जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) बॉन्ड क्या है?

भारत सरकार ने 16 जुलाई 2022 को जीरो-कूपन जीरो-प्रिंसिपल (ZCZP) बॉन्ड को सिक्योरिटीज के रूप में घोषित कर दिया है, जिसे निर्दिष्ट एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध किया जा सकता है।

जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल बॉन्ड स्कीम में ब्याज के साथ मूलधन भी नहीं मिलता है और इसे फेस वैल्यू पर जारी किया जाता है। इन्हें सोशल स्टॉक एक्सचेंजों पर प्रतिभूतियों के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है।

जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) बॉन्ड क्या है?

ये ऐसे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है जिसे कोई भी नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन जारी करके फंड प्राप्त कर सकती है। सामान्य तौर पर ये संस्थाएं इंडिविजुअल व्यक्तियों और कॉरपोरेशन से डोनेशन प्राप्त करती है लेकिन अब ये जेडसीजेडपी बॉन्ड को सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध करके धन जुटा सकती है।

ऑफिशियल गजट अधिसूचना के अनुसार, “जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट” एक गैर-लाभकारी संगठन (not-for-profit organisation) द्वारा जारी किया गया एक उपकरण है जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) रेगुलेशन के अनुसार किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के सोशल स्टॉक एक्सचेंज सेगमेंट के साथ पंजीकृत होगा।

देश में जीरो कूपन-जीरो प्रिंसिपल बॉन्ड की शुरुआत कैसे हुई?

वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 के आम बजट में सोशल स्टॉक एक्सचेंज के गठन का प्रस्ताव किया था। सितंबर 2021 में सेबी ने इस एक्सचेंज के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकृत नॉन फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन ये बॉन्ड जारी करके फंड जुटा सकती है।

सामान्य बॉन्ड और जीरो कूपन-जीरो प्रिंसिपल बॉन्ड में क्या अंतर है?

साधारण बॉन्ड में, जारीकर्ता को बॉन्ड की अवधि के अंत में बॉन्डधारक को एक निश्चित दर पर ब्याज के साथ मूलधन चुकाना होता है। लेकिन ZCZP बांड में, जारीकर्ता को न तो ब्याज देना पड़ता है और न ही मूलधन।

सामान बॉन्ड स्कीम में, बॉन्ड की एक निश्चित परिपक्वता अवधि होती है जैसे 3 साल, 5 साल, 10 साल आदि। लेकिन जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल प्लान में कोई निश्चित परिपक्वता अवधि नहीं होती है। इसमें इस फंड की मैच्योरिटी उस खास प्रोजेक्ट के पूरा होने तक होगी, जिसके लिए फंड जुटाया गया है।

जीरो कूपन-जीरो प्रिंसिपल बांड स्कीम से किसे लाभ होगा?

इस बॉन्ड से दो तरह के लोगों या संगठनों को फायदा होगाः

  1. जो दान करना चाहता है और बदले में टैक्स छूट प्राप्त करना चाहते है।
  2. वे लोग या संगठन जो सामाजिक कार्य के लिए धन जुटाना चाहते हैं।

देश में दान देना और लेना आसान बनाने के लिए यह नया इंस्ट्रूमेंट लाया गया है, जो सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं को बिना किसी शर्त धन जुटाने में मदद करते है।

जीरो कूपन-जीरो प्रिंसिपल बॉन्ड की मैच्योरिटी अवधि क्या होगी?

जेडसीजेडपी बॉन्ड स्कीम की परिपक्वता अवधि उस विशिष्ट परियोजना के पूरा होने तक होगी जिसके लिए ये बॉन्ड वित्त पोषण के लिए जारी किए जाएंगे। इस तरह से कहा जाए तो सामान्य बॉन्ड की तरह इनकी कोई निश्चित परिपक्वता अवधि नहीं होगी।

इनकम टैक्स सेक्शन 80G के तहत टैक्स छूट

इनकम टैक्स सेक्शन 80G के तहत शत-प्रतिशत टैक्स छूट केवल सरकार समर्थित संगठनों को किए गए दान पर ही मिलती है।

यदि आप किसी निजी संगठन को दान करते हैं, तो आप धारा 80G के तहत केवल दान की गई राशि के 50% तक कर छूट का दावा कर सकते है।

लेकिन, अब जीरो कूपन-जीरो प्रिंसिपल बॉन्ड के जरिए किसी भी पंजीकृत सरकारी और निजी संगठन को दान देने वालों को बॉन्ड की राशि के बराबर 100% टैक्स छूट मिलेगी।

सोशल स्टॉक एक्सचेंज क्या है?

सेबी ने सितंबर 2021 को गैर-लाभकारी और लाभकारी संगठनों को धन जुटाने में सक्षम बनाने के लिए एक सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज के निर्माण को मंजूरी दी।

ये सामाजिक संस्थान इक्विटी, जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल बॉन्ड, म्यूचुअल फंड, सोशल इम्पैक्ट फंड और डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड के जरिए फंड जुटा सकते हैं।

  • एक सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) गैर-लाभकारी या गैर-सरकारी संगठनों को स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध करने की अनुमति देता है।
  • उन्हें एक वैकल्पिक फंड-राइजिंग संरचना प्रदान करता है।
  • इसे बीएसई या एनएसई पर लिस्ट किया जा सकता है।
  • वर्तमान में यूके, कनाडा, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील जैसे देशों में एसएसई काम करते हैं।

यह एक तरह से सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों (एनजीओ) को बाजार से फंड जुटाने में मदद करेगा। इसका मतलब यह हुआ कि निजी कंपनियों की तरह अब सामाजिक उद्यम (एनजीओ और ऐसे अन्य संस्थान) भी खुद को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करा सकेंगे और धन जुटाने में सक्षम होंगे।