Types of Mutual Funds in Hindi (म्यूचुअल फंड के प्रकार)

म्युचुअल फंड में निवेश करने से पहले हमारे दिमाग में आता है कि म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं (Types of Mutual Funds in Hindi), म्युचुअल फंड में कितनी क्लास होती है, म्यूच्यूअल फंड की कितनी कैटेगरी होती है, म्युचुअल फंड्स का स्ट्रक्चर क्या होता है? आज हम इन सभी प्रश्नों के उत्तर पर नजर डालेंगे और आप इस पोस्ट के अंत में म्यूचुअल फंड के विभिन्न प्रकार की पीडीएफ (PDF) फाइल भी डाउनलोड कर सकते हैं।

Table of Contents

म्यूचुअल फंड के प्रकार (Types of Mutual Funds in Hindi)

म्यूचुअल फंड एक अनूठी निवेश पूलिंग इकाई (Investment pooling entity) है जो निवेशकों को एक ही मंच के माध्यम से प्रतिभूतियों की एक विस्तृत श्रृंखला में निवेश करने में सक्षम बनाती है।

आपको निश्चित रूप से निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड के बारे में शुरुआती जानकारी होनी चाहिए। बिना जानकारी और किसी के कहने पर कृपया निवेश ना करें।

म्यूचुअल फंड वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड (Types of Mutual Funds in Hindi) की पेशकश करके निवेश क्षितिज में विविधता लाने में मदद करते हैं।

म्यूचुअल फंड के जोखिम पोर्टफोलियो (Risk Portfolio) को स्पष्ट रूप से विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों जैसे इक्विटी, डेट और मुद्रा बाजार में विभाजित किया गया है।

हालांकि, बाजार में विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड होने के कारण, आपके लिए सबसे उपयुक्त फंड स्कीम का चयन करने का कार्य और भी जटिल हो जाता है। आइए, विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंडों पर एक नजर डालते हैं।

एसेट क्लास के आधार पर (Based on Asset Class)

इक्विटी फंड (Equity Funds)

इक्विटी म्यूचुअल फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जो कंपनी के इक्विटी शेयरों में मुख्य रूप से निवेश किये जाते है। इक्विटी फंड को जोखिम भरा माना जाता है लेकिन वे लंबी अवधि में अधिक और अच्छे रिटर्न देते हैं।

इन फंडों के लिए पूंजी वृद्धि (Capital appreciation) एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। लेकिन चूंकि इक्विटी फंडों पर रिटर्न स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है, इसलिए इन फंडों में जोखिम का स्तर अधिक होता है। यदि आप लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेश करना चाहते हैं तो यह एक अच्छा विकल्प है।

इक्विटी म्यूचुअल फंड भी कई प्रकार के होते है
  • मल्टी-कैप फंड्स
  • लार्ज-कैप फंड्स
  • मिड-कैप फंड्स
  • स्मॉल-कैप फंड्स
  • मूल्य निधि (Value Funds)
  • क्षेत्रीय/विषयगत फंड्स (Sectoral/ Thematic Funds)
  • इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)

निवेशक अपनी पसंद और निवेश की जरूरतों के आधार पर इनमें से कोई भी निवेश करने के लिए एक या विभिन्न फंड्स चुन सकते हैं।

डेट फंड (Debt Funds)

डेट फंड (जिसे फिक्स्ड इनकम फंड के रूप में भी जाना जाता है) का निवेश उद्देश्य निवेशकों को नियमित और स्थिर आय प्रदान करना है। ऐसी योजनाएं निश्चित आय प्रतिभूतियों जैसे बांड, कॉर्पोरेट डिबेंचर, सरकारी प्रतिभूतियों और मुद्रा बाजार के साधनों जैसे जमा प्रमाणपत्र (सीडी), वाणिज्यिक पत्र (सीपी) आदि में निवेश करती हैं।

डेट फंड भी कई प्रकार के होते है
  • ओवरनाइट फंड्स (Overnight Funds)
  • लिक्विड फंड्स (Liquid Funds)
  • अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स (Ultra-Short Duration Funds)
  • मुद्रा बाजार फंड्स (Money Market Funds)
  • लघु अवधि फंड्स (Short Duration Funds)
  • मध्यम अवधि फंड्स (Medium Duration Funds)
  • लंबी अवधि फंड्स (Long Duration Funds)
  • डायनेमिक बॉन्ड फंड्स (Dynamic Bond Funds)
  • कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स (Corporate Bond Funds)
  • क्रेडिट जोखिम फंड्स (Credit Risk Funds)
  • बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) फंड्स

अपनी निवेश करने की क्षमता और जरूरतों के आधार पर अपना पैसा इनमें से किसी भी डेट फंड में लगाएं। ये फंड अल्पकालिक निवेश लक्ष्यों के लिए आदर्श माने जाते हैं। डेट फंड इक्विटी योजनाओं की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं वही रिटर्न्स की संभावना भी इक्विटी फंड की तुलना में कम होता है।

हाइब्रिड फंड (Hybrid Funds)

हाइब्रिड फंड्स को एसेट एलोकेशन फंड्स के रूप में भी जाना जाता है। ये निवेश इक्विटी और फिक्स्ड-इनकम फंड का मिश्रण है जिसमें निवेश का निश्चित अनुपात 60% स्टॉक (Equity) और 40% बॉन्ड/Debt funds हो सकता है या इसके विपरीत निवेश अनुपात हो सकता है।

हाइब्रिड फंड भी कई प्रकार के होते है
  • इक्विटी-ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड्स (Equity-oriented Hybrid Funds)
  • ऋण-उन्मुख हाइब्रिड फंड्स (Debt-oriented Hybrid Funds)
  • मासिक आय योजनाएं (Monthly Income Plans )
  • आक्रामक हाइब्रिड फंड्स (Aggressive Hybrid Funds)
  • डायनेमिक एसेट एलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स
  • इक्विटी सेविंग फंड्स (Equity Savings Funds)
  • कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड्स (Conservative Hybrid Funds)
  • आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds)
  • बहु-परिसंपत्ति आवंटन फंड्स (Multi-Asset Allocation Funds)
  • बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड्स (Balanced Hybrid Funds)

अगर आप अपने निवेश में इक्विटी के साथ-साथ डेट भी चाहते हैं। हाइब्रिड फंड सही विकल्प हैं। हाइब्रिड फंड इक्विटी और फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज दोनों के मिश्रण में निवेश करते हैं जो इक्विटी और डेट (एसेट एलोकेशन) के बीच आवंटन के आधार पर होता है।

संरचना के आधार पर (Based on Structure)

ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड (Open-ended Mutual Funds)

ओपन एंडेड फंड्स सामान्य प्रकार के म्यूचुअल फंड्स माने जाते है। ओपन-एंडेड फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जहां कोई निवेशक किसी भी कारोबारी दिन निवेश कर सकता है।

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इन फंडों को वर्तमान नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर खरीदा और बेचा जाता है। ओपन-एंडेड फंड अत्यधिक लिक्विड फंड होते हैं क्योंकि निवेशक ट्रेडिंग दिवस में किसी भी समय रिडीम कर सकते है।

क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड (Close-ended Mutual Funds)

क्लोज-एंडेड फंड एक पूर्व-निर्धारित परिपक्वता अवधि के साथ आते हैं। निवेशक फंड के लॉन्च होने पर ही उसमें निवेश कर सकते हैं और मैच्योरिटी के समय ही फंड से अपना पैसा निकाल सकते हैं।

क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड की कीमत स्टॉक की तरह ही मांग और आपूर्ति पर आधारित होती है। क्लोज्ड-एंडेड म्यूचुअल फंड लिक्विड नहीं होते हैं और ट्रेडिंग की मात्रा कम होने के कारण कीमतें प्रति यूनिट सामान्य कीमत से कम होती हैं।

अंतराल निधि (Interval Funds)

वे फंड जिनमें ओपन-एंडेड और क्लोज-एंडेड के फीचर्स मिक्स होते हैं, इंटरवल फंड कहलाते हैं। यह क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड की तरह होत है, जो एक प्रारंभिक पेशकश यानी लॉन्चिंग के समय ही उपलब्ध होते है और फिर, फंड के कार्यकाल के दौरान अलग-अलग अंतराल पर फंड मैनेजमेंट कंपनी द्वारा शेयरों की पुनर्खरीद के लिए खोले जाते हैं।

इंटरवल फंड वे म्युचुअल फंड होते हैं, जिसमें फंड हाउस केवल एक विशेष पूर्व-निर्धारित समय अवधि के दौरान ही इकाइयों को खरीदने और बेचने की अनुमति देता है। उस पूर्व-निर्धारित अवधि के दौरान उनके पास ओपन-एंडेड फीचर होता है और बाकी समय के लिए क्लोज-एंडेड फीचर होता है। ये फंड ज्यादातर डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं।

निवेश के उद्देश्य के आधार पर

ग्रोथ फंड (Growth Funds)

ग्रोथ म्युचुअल फंड का मुख्य उद्देश्य पूंजी वृद्धि (Capital Appreciation) है। ये फंड पैसे का एक बड़ा हिस्सा शेयरों में लगाते हैं। इक्विटी में अधिक निवेश के कारण ये फंड अपेक्षाकृत अधिक जोखिम भरे हो सकते हैं और इसलिए इनमें लंबी अवधि के लिए निवेश करना अच्छा  माना जाता है।

इनकम फंड (Income Funds)

इनकम म्यूचुअल फंड डेट म्यूचुअल फंड का एक उप-वर्ग है। ये फंड डिबेंचर, बॉन्ड, सिक्योरिटीज और जमा प्रमाणपत्र (Certificates of Deposits) जैसी आय परिसंपत्तियों के मिश्रण में पैसे लगाते हैं। इनकम फंड का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को मध्यम वृद्धि के साथ एक स्थिर आय प्रदान करवाना है।

लिक्विड फंड (Liquid Funds)

लिक्विड फंड अल्पकालिक मुद्रा बाजार के साधनों जैसे ट्रेजरी बिल, जमा प्रमाणपत्र (सीडी), सावधि जमा, वाणिज्यिक पत्र (CP) आदि में पैसा लगाते हैं। लिक्विड फंड या अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म फंड (एक महीने से एक वर्ष) कम रिटर्न के साथ कम जोखिम के लिए जाने जाते हैं। निवेशक इसे अपने अल्पकालिक वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए चुन सकते हैं।

टैक्स सेविंग फंड (Tax Saving Funds)

टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड अन्य प्रकार के म्यूचुअल फंड की तरह ही होते हैं, जिसमें अतिरिक्त टैक्स सेविंग बेनिफिट होता है। टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड ऐसे फंड होते हैं जो इक्विटी में पैसा लगाते हैं। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) इसका एक उदाहरण है। इस प्रकार के म्यूचुअल फंड की खास बात यह है कि निवेशकों को टैक्स बेनिफिट अतिरिक्त मिलता है।

पूंजी संरक्षण फंड (Capital Protection Funds)

इन फंडों का प्राथमिक उद्देश्य निवेश किए गए धन की रक्षा करना है और इस प्रकार फंड इक्विटी और निश्चित आय निवेश के बीच विभाजित हो जाते हैं। यह निवेश किए गए मूलधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। ये फंड आपके मूल निवेश की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हैं और इस प्रकार ये मुख्य रूप से उच्च-रेटेड निश्चित आय प्रतिभूतियों में निवेश किये जाते है।

फिक्स्ड मैच्योरिटी फंड (Fixed Maturity Funds)

फिक्स्ड मैच्योरिटी फंड वे होते हैं जिनमें संपत्ति को डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है। फिक्स्ड मैच्योरिटी फंड में निवेश क्लोज-एंडेड डेट फंड में किया जाता है, जिनकी मैच्योरिटी की निश्चित तारीख होती है। स्टॉक मार्केट में निवेश करने के लिए बेस्ट 3-इन-1 डीमैट अकाउंट खुलवाकर इनमें निवेश शुरू कर सकते हैं।

पेंशन निधि (Pension Funds)

पेंशन फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जिन्हें लंबी अवधि के लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश किया जाता है। ये मुख्य रूप से उस समय के आसपास नियमित रिटर्न प्रदान करने के लिए होते हैं जब निवेशक सेवानिवृत्त होने के लिए तैयार होता है।

पेंशन फंड में पैसा इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है जहां इक्विटी निवेश को बढ़ाने में मदद करती है और डेट फंड जोखिम का संतुलन बनाए रखते हैं। पेंशन फंड से पैसा एकमुश्त या नियमित पेंशन या दोनों के संयोजन के रूप में निकाला जा सकता है।

जोखिम के आधार पर (Based on Risk)

कम जोखिम वाले फंड (Low-risk Funds)

इस प्रकार के म्यूचुअल फंड डेट मार्केट में निवेश किये जाते हैं जहां निवेश का जोखिम बहुत कम होता है। इनमें निवेश लंबी अवधि के लिए होता हैं लेकिन इससे जुड़े कम जोखिम के कारण रिटर्न भी मध्यम होता है। रिटर्न 4-10% हो सकता है, लेकिन जब फंड की किमत स्थिर हो जाती है तो निवेशक स्विच करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

मध्यम जोखिम वाले फंड (Medium-risk Funds)

ये फंड्स मध्यम जोखिम के होते है। मध्यम जोखिम वाले म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए आदर्श हैं जो अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न पाने के लिए कुछ जोखिम उठाने को तैयार हैं। फंड निवेश पोर्टफोलियों डेट और इक्विटी फंड का मिश्रण होता है। औसत रिटर्न 8-15% हो सकता है।

उच्च जोखिम वाले फंड (High-risk Funds)

यह उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो जोखिम उठा सकते हैं और अच्छा रिटर्न चाहते हैं। ज्यादातर पैसा इक्विटी मार्केट में निवेश किया जाता है। इसमें आप 15% या उससे अधिक रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। इन फंडों में जोखिम अधिक होता है तो रिटर्न भी बहुत अधिक होता है, इसलिए यदि आप अधिक रिटर्न अर्जित करना चाहते हैं और जोखिम लेने में सक्षम हैं, तो आप इन फंडों में निवेश कर सकते हैं।

विशेषता के आधार पर (Based on Specialty)

क्षेत्र निधि (Sector Funds)

ये ऐसे फंड हैं जो बाजार के किसी विशेष क्षेत्र (Sector) में निवेश किये जाते हैं उदाहरण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड केवल उन्हीं इंस्ट्रूमेंट्स या कंपनियों में निवेश किये जाते हैं जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से संबंधित हैं। रिटर्न चुने हुए क्षेत्र के प्रदर्शन से जुड़ा होता है। इन योजनाओं में शामिल जोखिम उस सेक्टर की प्रकृति पर निर्भर करता है।

इंडेक्स फंड (Index Funds)

ये ऐसे फंड्स हैं जो उन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किये जाते हैं जो किसी एक्सचेंज पर एक विशेष इंडेक्स का प्रतिनिधित्व करते हैं और इंडेक्स में पैसा लगाते हैं। ये निष्क्रिय रूप से प्रबंधित फंड (Passively Managed Funds) हैं जिसका अर्थ है कि फंड मैनेजर उसी अनुपात में अंतर्निहित इंडेक्स (Underlying Index) में मौजूद प्रतिभूतियों में निवेश करता है और पोर्टफोलियो संरचना को नहीं बदलता है।

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Exchange-traded Funds)

ये इंडेक्स फंड से संबंधित है और इसे एक्सचेंजों पर खरीदा और बेचा जाता है। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड ने निवेश संभावनाओं की एक नई दुनिया को खोल दिया है, जिससे निवेशकों को विदेशों में शेयर बाजारों के साथ-साथ विशेष क्षेत्रों (सेक्टरों) में व्यापक निवेश प्राप्त करने में मदद मिली है। एक ईटीएफ (ETF) एक म्यूचुअल फंड की तरह है जिसे वास्तविक समय में उस कीमत पर ट्रेड किया जा सकता है जो एक दिन में कई बार बढ़ या गिर सकता है।

इमर्जिंग मार्केट फंड्स (Emerging Market Funds)

इमर्जिंग मार्केट फंड्स के माध्यम से विकासशील देशों में निवेश किया जाता है जो आर्थिक रूप से अच्छी दर से आगे बढ़ रहे हैं। इन फंडों को जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि ये फंड उस विकासशील देश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर निर्भर करते है जिसमें निवेश किया जाता है।

कमोडिटी-केंद्रित स्टॉक फंड (Commodity-focused Stock Funds)

ये फंड उन इन्वेस्टर्स के लिए अच्छे माने जाते हैं जो जोखिम को सहन कर सकते हैं और अपने पोर्टफोलियो में विविधता चाहते हैं। कमोडिटी-केंद्रित स्टॉक फंड कई ओर विविध ट्रेडों में काम करने का मौका देते हैं। रिटर्न, स्टॉक कंपनी या कमोडिटी के परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है।

मार्केट न्यूट्रल फंड (Market Neutral Funds)

इन फंडों को मार्केट न्यूट्रल फंड कहा जाने का कारण यह है कि ये सीधे स्टॉक मार्केट में निवेश नहीं किये जाते हैं। ये ट्रेजरी बिल, ईटीएफ और प्रतिभूतियों में निवेश किये जाते हैं और एक निश्चित और स्थिर विकास को लक्षित करने का प्रयास करते हैं। अच्छा रिटर्न बनाए रखते हुए प्रतिकूल बाजार प्रवृत्तियों से सुरक्षा चाहने वाले निवेशकों के लिए, बाजार-तटस्थ फंड उद्देश्य को पूरा करते हैं। बेहतर जोखिम-अनुकूलता (Risk-adaptability) के साथ, ये फंड उच्च रिटर्न देते हैं।

उल्टा/लीवरेज फंड्स (Inverse/leveraged Funds)

ये फंड सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह काम नहीं करते हैं। जब बाजार में गिरावट आती है तो वे लाभ कमाते हैं और जब बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है तो उन्हें नुकसान होता है। ऐसे फंडों में जोखिम बहुत अधिक होता है क्योंकि वे बाजार की स्थितियों के अनुसार आपको भारी नुकसान या लाभ दिला सकते हैं।

फंड्स ऑफ फंड्स (Funds of Funds)

फंड्स ऑफ फंड्स वे म्यूचुअल फंड के प्रकार (Types of Mutual Funds) होते है जो अन्य म्यूचुअल फंड में निवेश किये जाते हैं। रिटर्न पूरी तरह से टारगेट फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इस प्रकार के फंड को मल्टी-मैनेजर फंड भी कहा जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय फंड्स (International Funds)

इन फंडों को विदेशी फंड के रूप में भी जाना जाता है जो दुनिया के अन्य हिस्सों में स्थित कंपनियों में निवेश की पेशकश करते हैं। ये कंपनियां उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भी हो सकती हैं, लेकिन निवेश स्वदेश में नहीं हो सकता। स्टॉक मार्केट के विभिन्न प्रकार के निवेशक अपनी निवेश क्षमता के अनुसार इनमें निवेश करना पसंद करते हैं।

ग्लोबल फंड्स (Global Funds)

ग्लोबल फंड्स इंटरनेशनल फंड्स से थोडे अलग होते हैं। ये फंड्स मुख्य रूप से दुनिया भर के बाजारों में निवेश किये जाते है, इसमें आपके देश में निवेश भी शामिल होता है जबकि इंटरनेशनल फंड पूरी तरह से विदेशी बाजारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

रियल एस्टेट फंड (Real Estate Funds)

ये वे फंड हैं जो उन कंपनियों में निवेश किये जाते हैं जो रियल एस्टेट क्षेत्रों में काम करती हैं। रियल एस्टेट में निवेश किसी भी स्तर पर किया जा सकता है, जिसमें ऐसी परियोजनाएं शामिल हैं जो योजना चरण या कार्य प्रगति में हैं या आंशिक रूप से पूरी हो चुकी हैं या वास्तव में पूरी हो चुकी हैं।

एसेट एलोकेशन फंड (Asset Allocation Funds)

विभिन्न प्रतिभूतियों में किया गया निवेश जैसे डेट, इक्विटी, सोना आदि को एसेट एलोकेशन फंड के रूप में जाना जाता है। यह एक पूर्व-निर्धारित फॉर्मूला या मौजूदा बाजार के रुझानों के आधार पर बहुत ही लचीला फंड माना जाता है। यह लगभग हाइब्रिड फंड की तरह है।

गिल्ट फंड (Gilt Funds)

गिल्ट फंड वे म्यूचुअल फंड के प्रकार होते हैं जहां फंड को लंबी अवधि के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। यह उन लोगों के लिए आदर्श निवेश योजना हो सकती है जो जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। ये फंड अलग-अलग परिपक्वता वाले उपकरणों में निवेश किए जाते हैं। चूंकि पैसा सरकार के पास निवेश किया जाता है, इसलिए कहा जाता है कि इन फंडों में न्यूनतम जोखिम होता है।

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हमने ऊपर Various Types of Mutual Funds in Hindi के बारे में जानकारी प्राप्त की, कृपया निवेश करने से पहले अपने फंड हाउस और इंटरनेट से बेसिक जानकारी प्राप्त करलें क्योंकि निवेश क्षमता, जोखिम क्षमता और शॉर्ट टर्म, लॉन्ग टर्म आवश्यकता के अनुसार म्यूचुअल फंड कई प्रकार के होते हैं।