बिजनेस स्वामित्व के प्रकार (Types of Business Ownership)

व्यवसाय स्वामित्व (Business Ownership) वह प्रक्रिया है जो कानून के तहत किसी भी बिजनेस को पंजीकृत करती है। यह कानून की नजर में बिजनेस को अलग कानूनी पहचान प्रदान करती है। किसी भी व्यवसाय का स्वामित्व मिलने के बाद उसकी प्रतिष्ठा और ख्याति बढ़ती है और लोग उस पर भरोसा करने लगते हैं।

बिजनेस स्वामित्व के प्रकार (Types of Business Ownership in Hindi)

व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार बिजनेस ऑनरशिप कई प्रकार की होती हैं, उदाहरण के लिए 1. एकल स्वामित्व, 2. भागीदारी फर्म, 3. निगम, 4. सीमित देयता कंपनी, 5 गैर-लाभकारी संगठन, 6. सहकारी समिति आदि। आइए, बिजनेस ऑनरशिप के विभिन्न प्रकार व रूपों के बारे में जानते हैं।

एकल स्वामित्व (Sole Proprietorship)

एकल स्वामित्व व्यवसाय स्वामित्व का सबसे सरल रूप है जिसके तहत एक व्यक्ति एक व्यावसायिक संगठन संचालित कर सकता है। बिजनेस के विभिन्न प्रकार में सोल प्रोपराइटरशिप एक बिजनेस स्वामित्व का बहुत ही कॉमन और जाना पहचाना रूप है।

यह एक अलग कानूनी इकाई नहीं है, यह केवल उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो व्यवसाय का मालिक है और इसकी सभी देनदारियों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार है।

इसमें किसी भी प्रकार के निगमन या पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। एक Sole Proprietorship के मालिक को केवल अपना नाम पंजीकृत करने और स्थानीय लाइसेंस लेकर बिजनेस शुरू करने की आवश्यकता होती है।

साझेदारी फर्म (Partnership Firm)

साझेदारी एक प्रकार का व्यवसाय स्वामित्व है जहां दो या दो से अधिक लोगों के बीच एक औपचारिक समझौता साझेदार बनने, जिम्मेदारियों को वितरित करने और बिजनेस व व्यापार से होने वाले लाभ या हानि को साझा करने के लिए किया जाता है।

पार्टनरशिप को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा गया है – 1. जनरल पार्टनरशिप, 2. लिमिटेड पार्टनरशिप, 3. लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप, 4. विल पर पार्टनरशिप।

एक साझेदारी व्यवसाय में, सभी भागीदार देनदारियों और लाभों को समान रूप से साझा करते हैं। एक पार्टनरशिप फर्म में कोई भी व्यक्ति, बिजनेस, ऑर्गनाइजेशन, स्कूल, गवर्नमेंट बॉडी आदि शामिल हो सकते है।

निगम (Corporation)

निगम व्यक्तियों को लाभ उत्पन्न करने के लिए एक साथ काम करने की अनुमति देते हैं। निगम का गठन राज्य या देश स्तर पर किया जाता है। एक कॉर्पोरेट के रूप में आप उदाहरण के तौर पर भारत की टॉप 500 कंपनियों के नाम देख सकते हैं।

एक निगम यानी कॉरपोरेशन एक कानूनी इकाई होता है, इसका मतलब है कि यह अपने मालिकों से अलग इकाई है जिन्हें शेयरधारक कहा जाता है।

इसे एक लाभ कमाने वाले या गैर-लाभकारी संगठन के रूप में स्थापित किया जा सकता है और इसे सार्वजनिक या निजी तौर पर आयोजित किया जा सकता है।

जब एक निगम का गठन होता है, या बाद में जैसे-जैसे इसका विस्तार होता है, इसके शेयर जनता के लिए खरीदने के लिए उपलब्ध होते हैं। निगम दो प्रकार के होते हैं 1. C corporations (C corps) 2. S corporations (S corps).

सीमित देयता कंपनी (Limited Liability Company)

सीमित देयता कंपनियाँ हाइब्रिड व्यावसायिक संस्थाएँ हैं जो एक निगम और साझेदारी की विशेषताओं को जोड़ती हैं। इसकी सीमित देयता विशेषता निगम के समान है और सदस्यों को फ्लो-थ्रू कराधान की उपलब्धता साझेदारी की एक विशेषता है।

व्यवसाय स्वामित्व का यह रूप मालिक की व्यक्तिगत संपत्ति की रक्षा करता है और व्यवसाय में उसकी देनदारियों को ठीक करता है, ताकि उन्हें अपनी संपत्ति से कोई मुआवजा न देना पड़े।

एक निगम की तरह, एक एलएलसी एक अलग और विशिष्ट कानूनी इकाई है। इसका मतलब है कि यह एक कर पहचान संख्या (tax identification number) प्राप्त कर सकती है और अपने नाम से व्यापार कर सकती है।

गैर लाभकारी संगठन (Non-profit Organization)

एक गैर-लाभकारी संगठन (एनपीओ) जिसे गैर-व्यावसायिक इकाई के रूप में भी जाना जाता है, कानून के तहत एक कानूनी इकाई है जो सामूहिक, सार्वजनिक या सामाजिक लाभ के लिए आयोजित की जाती है।

गैर लाभकारी संगठन एक प्रकार का व्यवसाय स्वामित्व नहीं है, यह सिर्फ एक सामाजिक लाभ संगठन है जिसे समाज के लाभ और हित के लिए बनाया जाता है।

गैर-लाभकारी संगठनों के कोई शेयरधारक नहीं हैं, इसका लाभ समान रूप से और बिना किसी भेदभाव के समाज के लाभ के लिए वितरित किया जाता हैं।

गैर-लाभकारी संस्थाएं आमतौर पर कर-मुक्त होने के लिए सरकारों से अनुमोदन मांगती हैं और कुछ कर-कटौती योग्य योगदान प्राप्त करने के लिए भी योग्य हो सकती हैं।

सहकारी समिति (Co-operative)

सहकारी समिति जिसे Co-operative भी कहा जाता है, एक व्यावसायिक संगठन है जिसका स्वामित्व और नियंत्रण उन लोगों द्वारा किया जाता है जो इसके उत्पादों या सेवाओं का उपयोग करते हैं।

इसका उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की ओर से स्वयं सहायता को प्रोत्साहित करना है। यह एक प्रकार का व्यवसाय स्वामित्व नहीं है, यह एक समूह की तरह एक पारस्परिक संगठन है, जहा, प्रत्येक सदस्य का समान अधिकार है।

सहकारी समितियों का गठन सभी सदस्यों के विशिष्ट बिजनेस उद्देश्य और जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। यह अपने सदस्यता आकार के अनुसार विभिन्न प्रकार की हो सकती है।

इसके प्रत्येक सदस्य को एक मत का अधिकार है जो सत्ता के एकीकरण को रोकता है और सभी को लाभ के बंटवारे में समान हिस्सा प्रदान करता है।

आपने ऊपर कई प्रकार के व्यवसाय स्वामित्व यानी बिजनेस ऑनरशिप के बारे में जानकीरी प्राप्त की, जो अपनी व्यावसायिक प्रकृति के अनुसार विभिन्न रूपों की होती हैं।

इन सभी बिजनेस ऑनरशिप की प्रकृति और प्रकारों के अनुसार अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं जिनमें कुछ सीमित देयता की विशेषता प्रदान करते हैं और कुछ व्यवसाय को कानूनी पहचान प्रदान करते हैं।

आप अपनी क्षमता के अनुसार अपने व्यवसाय को पंजीकृत करके बिजनेस का स्वामित्व प्राप्त कर सकते हैं, जो आपके बिजनेस कार्य, प्रकृति, उद्देश्य, लक्ष्य, बजट और प्रबंधन क्षमता के अनुसार अलग-अलग होते है।