प्रोपराइटरशिप क्या है (Proprietorship in Hindi)

सोल प्रोपराइटरशिप फर्म कम खर्च में तुरंत बिजनेस शुरू करने का सबसे आसान तरीका है। प्रोपराइटरशिप (Proprietorship in Hindi) नए छोटे व्यवसाय जैसे किराना स्टोर, खुदरा व्यापार, पार्लर, छोटे व्यापारियों और निर्माताओं आदि के लिए एक प्रसिद्ध व्यवसाय स्वामित्व (बिजनेस ओनरशिप) है जो कुशल मैनेजमेंट और पूर्ण नियंत्रण के साथ व्यापार की तरक्की को सुनिश्चित करता है।

प्रोपराइटरशिप क्या है (Proprietorship kya hai)

एकमात्र स्वामित्व (Sole Proprietorship) व्यवसाय स्वामित्व का सबसे सरल रूप है जिसके तहत एक व्यक्ति एक बिजनेस का मालिक, प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन करता है, जो अपने व्यवसाय से अर्जित लाभ पर व्यक्तिगत आयकर का भुगतान करता है। इसे सोल ट्रेडर (Sole Trader), व्यक्तिगत उद्यमिता या प्रोपराइटरशिप (Proprietorship) के रूप में भी जाना जाता है।

सोल प्रोपराइटरशिप (एकल स्वामित्व) एक कानूनी इकाई नहीं है। यह एक अनिगमित व्यवसाय (Unincorporated Business) है। यह केवल उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो व्यवसाय का मालिक है जिसे प्रोपराइटर कहा जाता है जो अपनी सभी देनदारियों और ऋणों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होता है।

प्रोपराइटरशिप बिजनेस की प्रत्येक संपत्ति मालिक के स्वामित्व में होती है और व्यवसाय के सभी ऋण मालिक के ऋण माने जाते हैं क्योंकि कानून के तहत एकमात्र स्वामित्व या प्रोपराइटरशिप की कोई अलग पहचान नहीं होती है।

ये संस्थाएं व्यवसायों के एकमात्र मालिकों, व्यक्तिगत स्व-ठेकेदारों, सलाहकारों, छोटे व्यवसायों और अन्य स्व-नियोजित व्यक्तियों (Self-employed Individuals) के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। कई सोल प्रोपराइटर्स अपने स्वयं के नाम या नए बिजनेस नाम से व्यवसाय करते हैं क्योंकि प्रोपराइटरशिप में व्यवसाय या बिजनेस का अलग नाम रखने की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रोपराइटरशिप (Proprietorship in Hindi) अपनी स्थापना में आसानी और मामूली लागत के कारण बिजनेस के स्वामित्व का एक लोकप्रिय रूप है। एक सोल प्रोपराइटर को केवल अपना बिजनेस नाम पंजीकृत करने और स्थानीय लाइसेंस प्राप्त करके अपना काम शुरू करने की आवश्यकता होती है।

इसे आमतौर पर निगमित (Incorporated) करने की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए यह छोटे या मध्यम स्तर के व्यवसायों के लिए आदर्श विकल्प है। भारत जैसे विकासशील देश में प्रोपराइटरशिप को शुरुआती स्तर पर बिजनेस करने का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।

एक Sole Proprietorship कॉरपोरेशन, लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी (LLC), लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) से अलग होती है, जिसमें अलग से कोई कानूनी इकाई (legal entity) नहीं बनाई जाती है। नतीजतन, प्रोपराइटरशिप के मालिक को व्यवसाय की देनदारियों से छूट नहीं मिलती है और आमतौर पर वह अपने नाम से अनुबंध पर हस्ताक्षर करता है।

एक प्रोपराइटरशिप फर्म अपने मालिक यानी प्रोपराइटर के नाम से संचालित हो सकती है या यह एक काल्पनिक नाम के तहत व्यापार कर सकती है। काल्पनिक नाम का सीधा सा अर्थ है एक बिजनेस नाम जो व्यवसाय का कानूनी नाम नहीं है, यह आपके व्यवसाय की पहचान के लिए आपकी पसंद के अनुसार कोई भी नाम हो सकता है।

एकल स्वामित्व (Sole Proprietorship) का विकल्प कौन चुन सकता है?

कोई भी व्यक्ति जो कम निवेश के साथ अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है और अपने हाथों में बिजनेस का पूर्ण नियंत्रण रखना चाहता है, वह प्रोपराइटरशिप फर्म का विकल्प चुन सकता है। आप 10 से 15 दिनों के अंदर अपने बिजनेस को एक प्रोपराइटरशिप के तहत रजिस्टर करवा कर बहुत ही कम खर्च में काम शुरू कर सकते हैं।

कई स्थानीय व्यवसाय (Local Businesses) जैसे किराना स्टोर, कॉस्मेटिक आइटम स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक स्टोर, पार्लर, बुटीक, खुदरा स्टोर आदि को एकल स्वामित्व वाली फर्म (Sole Proprietorship Firm) के रूप में स्थापित किया जा सकता है। छोटे व्यापारी और निर्माता (Small Traders and Manufacturers) भी एक एकल स्वामित्व वाली फर्म का रजिस्ट्रेशन कर भारत में कहीं से भी अपना व्यापार कर सकते हैं।

व्यवसाय के स्वामी के रूप में, प्रोपराइटर सभी राजस्व और लाभ के हकदार होते हैं, लेकिन वे सभी ऋण और देनदारियों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। क्योंकि, प्रोपराइटर और व्यवसाय के बीच कोई कानूनी अलगाव नहीं होता है इसलिए उनकी सभी व्यक्तिगत संपत्तियां भी जोखिम में रहती हैं। एकल स्वामित्व द्वारा अर्जित आय उसके मालिक द्वारा अर्जित आय मानी जाती है।

जब आप अकेले कोई बिजनेस शुरू करते हैं, तो आप स्वतः ही एकमात्र मालिक (sole proprietor) बन जाते हैं, लेकिन आपको अपना व्यवसाय संचालित करने के लिए लाइसेंस और परमिट की आवश्यकता होती है। लाइसेंस और परमिट की आवश्यकता आपके उद्योग, इंडस्ट्री, राज्य और इलाके पर निर्भर करती हैं।

प्रोपराइटरशिप की विशेषताएं (Features of Proprietorship in Hindi)

एकल स्वामित्व की कई विशेषताएं हैं जैसे – यह मालिक से अलग इकाई नहीं है, इसकी कोई सीमित देयता नहीं है, एकल स्वामित्व, मालिक के सभी जोखिम और लाभ आदि। इसके पंजीकरण में आसानी के कारण इसे छोटे और मध्यम व्यवसाय के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

कोई अलग इकाई नहीं (No Separate Entity)

व्यवसाय और स्वामी एक ही माने जाते हैं। एकल स्वामित्व पर कोई अलग कानूनी पहचान नहीं दी जाएगी। एकमात्र व्यापारी के बिना, व्यवसाय की कोई पहचान नहीं है क्योंकि वह एकमात्र व्यक्ति है जो सभी व्यावसायिक गतिविधियों को करता है।

असीमित दायित्व (Unlimited Liability)

चूंकि मालिक और व्यवसाय के बीच कोई अलगाव नहीं है यानी दोनों को एक ही माना जाता है इसलिए मालिक का व्यक्तिगत दायित्व भी असीमित है। इस मामले में, मालिक स्वयं सभी देनदारियों और भुगतानों का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है।

एकल स्वामित्व (Single Ownership)

यह एक प्रकार का व्यवसाय स्वामित्व है, जिसमें एक व्यक्ति पूरे व्यवसाय का मालिक होता है और उसे नियंत्रित करता है यानी सभी संपत्ति और दायित्व मालिक के होते है। एकमात्र मालिक होने के नाते, उसे कई फायदे भी मिलते हैं और कई जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

जोखिम और लाभ (Risk and Profit)

सोल प्रोपराइटरशिप (sole proprietorship) में व्यवसाय स्वामी एकमात्र जोखिम वाहक है। चूंकि वह केवल एक निवेशक है और अपनी फंडिंग करता है, परिणामस्वरूप, उसे व्यवसाय के स्वामित्व के सभी जोखिम और देनदारियों को भी वहन करना होगा।

लाभ और हानि का कोई बंटवारा नहीं (No Sharing Profits/Losses)

एकल स्वामित्व व्यवसाय से जो भी आय उत्पन्न होती है, वह केवल मालिक की होती है। व्यवसाय के लाभ और हानि को किसी के साथ साझा नहीं किया जाता है, जिससे प्रोपराइटरशिप मालिकों को बेस्ट रिजल्ट मिलता है।

बनाने और बंद करने में आसान (Easy to Formation&Closure)

इस प्रकार का व्यवसाय संगठन स्वयं स्वामी द्वारा बनाया जाता है और कुछ कानूनी औपचारिकताओं की आवश्यकता होती है जो केवल व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक लाइसेंस या प्रमाणपत्र है। मालिक बिना किसी कानूनी बाध्यता के किसी भी समय अपने विवेक से अपना बिजनेस बंद कर सकता है।

कम कानूनी औपचारिकताएं (Less Legal Formalities)

एक एकल ट्रेडरशिप व्यवसाय के गठन, संचालन और बंद करने के लिए कानूनी आवश्यकताएं किसी भी अन्य प्रकार के व्यावसायिक स्वामित्व की तुलना में न्यूनतम हैं। हालांकि, व्यवसाय के उद्देश्य के लिए, इसे स्थानीय स्वशासन के साथ पंजीकृत किया जा सकता है और पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

व्यापार निरंतरता की कमी (Lack of Business Continuity)

व्यवसाय और मालिक की एक ही पहचान होती है इसलिए प्रोपराइटरशिप फर्म (Proprietorship Firm) पूरी तरह से उसके मालिक पर निर्भर होती है। एकमात्र मालिक की मृत्यु, दिवालियेपन का सीधा प्रभाव व्यवसाय पर पड़ता है या इससे व्यवसाय बंद हो सकता है।

व्यापार सरलता (Business Simplicity)

एक प्रोपराइटरशिप व्यवसाय स्थापित करने और संचालित करने का सबसे आसान और कम खर्चीला रूप है। यह नए स्टार्टअप, स्व-नियोजित ठेकेदारों और घर-आधारित व्यवसायों के लिए सबसे आदर्श मानी जाती है।

प्रोपराइटरशिप के लाभ (Advantages of Proprietorship in Hindi)

  • एक मालिक के पास पूरे व्यवसाय का पूरा नियंत्रण होता है। इस प्रकार, यह त्वरित निर्णय और व्यापार करने की स्वतंत्रता की सुविधा प्रदान करता है।
  • वित्तीय विवरण या ऐसे किसी अन्य दस्तावेज को किसी भी सदस्य को प्रकाशित करने के लिए अलग से स्वामित्व की आवश्यकता नहीं है।
  • केवल व्यवसाय का स्वामी होने के कारण बिजनेस से संबंधित सभी जानकारियां निजी और गोपनीय होती है।
  • व्यवसाय के स्वामी को अपने किसी भी लाभ को साझा करने की आवश्यकता नहीं होती है, परिणामस्वरूप वह एकमात्र संगठन (Sole Organization) से अधिकतम प्रोत्साहन (Incentive) प्राप्त करता है।
  • एकमात्र मालिक के रूप में, आपके पास व्यवसाय का 100% स्वामित्व होता है और आपको सभी निर्णय लेने का अधिकार होता है।
  • शेयरधारक की बैठकें आयोजित करने या प्रबंधन और व्यवसाय प्रशासन के मुद्दों पर वोट लेने की आवश्यकता नहीं है।
  • प्रोपराइटरशिप कुछ नियामक आवश्यकताओं का पालन करती है जिसके कारण इसे बहुत कम समय और न्यूनतम प्रयास में स्थापित किया जा सकता है।
  • निगमों के विपरीत, प्रोपराइटरशिप को विभिन्न सरकारी आवश्यकताओं पर समय और संसाधन खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती है जैसे कि वित्तीय जानकारी आम जनता को रिपोर्ट करना आदि।
  • साझेदारी और निगमों के विपरीत, एकल स्वामित्व आमतौर पर पूंजी जुटाने के लिए कम विकल्पों का आनंद लेते हैं इसलिए मालिक के अधीन व्यवसाय का संपूर्ण नियंत्रण होता है।
  • एक एकल मालिक को कोई भी निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। अतः व्यावसायिक संगठन के अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्णय शीघ्र और बेहतर होते है।

प्रोपराइटरशिप की सीमाएं (Limitations of Proprietorship in Hindi)

1. एक एकल मालिक (sole proprietor) के संसाधन उसकी बचत और रिश्तेदारों से उधार लेने तक सीमित होते हैं। व्यवसाय की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण बैंक ऋण देने में भी हिचकिचाते हैं या इनकार कर सकते हैं।

2. एकल स्वामित्व की प्रमुख सीमा यह है कि मालिक की असीमित देयता होती है। यदि व्यवसाय किसी समस्या का सामना करता है और अपनी देनदारियों का भुगतान करने में असमर्थ होता है, तो लेनदार न केवल व्यावसायिक संपत्ति से दावा कर सकते है, बल्कि मालिक की व्यक्तिगत संपत्ति से भी दावा कर सकते है।

3. एकमात्र स्वामित्व एक कानूनी अलग इकाई नहीं है। यह एक अनिगमित व्यवसाय है। यह केवल उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो व्यवसाय का मालिक है जो इसकी सभी देनदारियों और ऋणों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार है।

4. व्यवसाय और स्वामी एक ही हैं। एकमात्र व्यापारी ((sole proprietor) के बिना, व्यवसाय की कोई पहचान नहीं है क्योंकि वह एकमात्र व्यक्ति है जो सभी व्यावसायिक गतिविधियों को करता है।

5. एकमात्र मालिक की मृत्यु, शारीरिक बीमारी, कारावास, पागलपन या दिवालियेपन का सीधा असर व्यवसाय पर पड़ता है, लेकिन लाभार्थी, कानूनी उत्तराधिकारी, मालिक की ओर से व्यवसाय चला सकते है।

क्या सोल प्रोपराइटरशिप रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है?

नहीं, यह रजिस्ट्रेशन करवाना कानून के अनुसार अनिवार्य नहीं है। हालांकि, आप अपने बिजनेस पहचान, टैक्स बेनिफिट और बेहतर बिजनेस मैनेजमेंट के लिए अपनी सोल प्रोपराइटरशिप फर्म का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

कानून के अनुसार, सोल प्रोपराइटरशिप फर्म और बिजनेस के मालिक प्रोपराइटर को एक ही माना जाता है, इसलिए प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार के रजिस्ट्रेशन को लेकर कानूनी बाध्यता नहीं है।

अगर आपके व्यवसाय का कुल टर्नओवर माल की बिक्री के लिए ₹40 लाख या सेवाओं की बिक्री के लिए ₹20 लाख से ज्यादा है तो आपके लिए जीएसटी नंबर प्राप्त करना अनिवार्य है।

प्रोपराइटरशिप फर्म पंजीकरण प्रक्रिया (Proprietorship Firm Registration Process)

एक सोल प्रोपराइटरशिप फर्म को किसी विशिष्ट पंजीकरण या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन मालिक को फर्म के बेहतर संचालन व टैक्स बेनिफिट के लिए कुछ आवश्यक पंजीकरण प्राप्त करने की सलाह दी जाती है। प्रोपराइटरशिप फर्म पंजीकरण प्रक्रिया इस प्रकार हैः

  • प्रोपराइटर पैन कार्ड के लिए आवेदन करना।
  • प्रोपराइटरशिप फर्म का एक नाम रखना।
  • व्यवसाय के नाम पर बैंक खाता खोलना।
  • एकल स्वामित्व के लिए आवश्यक दस्तावेज
    • आधार कार्ड
    • पैन कार्ड
    • पंजीकृत कार्यालय प्रमाण
    • बैंक खाता
  • सोल प्रोपराइटरशिप फर्म के लिए आवश्यक मूल पंजीकरण इन तीन प्रकार के अधिनियम के तहत होता है।
    • एमएसएमई पंजीकरण (MSME Registration)
    • दुकान और स्थापना अधिनियम लाइसेंस (Shop and Establishment Act License)
    • वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण (GST Registration)

1. एमएसएमई पंजीकरण (MSME Registration)

एक सोल प्रोपराइटरशिप फर्म को लघु और मध्यम उद्यम (Small and Medium Enterprise) पंजीकरण प्राप्त करना अनिवार्य नहीं है। पंजीकरण MSME की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकता है।

2. दुकान और स्थापना अधिनियम लाइसेंस (Shop and Establishment Act License)

दुकान और स्थापना अधिनियम लाइसेंस सभी एकल स्वामित्व वाली फर्मों के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन अधिकांश फर्मों को अपने व्यवसाय के क्षेत्र के स्थानीय कानूनों के अनुसार यह लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक है। दुकान और प्रतिष्ठान का लाइसेंस नगर पालिका द्वारा जारी किया जाता है। पंजीकरण प्रक्रिया राज्यवार निर्भर करती है।

3. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण (GST Registration)

यदि आपका कुल कारोबार माल की बिक्री (Sales of Goods ) के लिए ₹40 लाख (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए ₹20 लाख) या सेवाओं की बिक्री (Sales of Services) के लिए ₹20 लाख (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए ₹10 लाख) से अधिक है, तो आपको जीएसटी के लिए पंजीकरण करना होगा।

यदि व्यवसाय का स्वामी Amazon, Flipkart आदि जैसे ई-कॉमर्स पोर्टल पर उत्पादों को ऑनलाइन बेचना चाहता है, तो भी GST नंबर लेना अनिवार्य है।

यदि आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं और आपके पास पर्याप्त धन नहीं है, तो एकल स्वामित्व या सोल प्रोपराइटरशिप (Sole Proprietorship in Hindi) आपके लिए सही है क्योंकि व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको अधिक धन और कानूनी औपचारिकताओं की आवश्यकता नहीं है और आप कम खर्च में अपने बिजनेस को एक पहचान दे सकते है।