पैराग्लाइडिंग क्या है और इसमें करियर कैसे बनाएं?

पैराग्लाइडिंग (Paragliding) विश्वभर में काफी लोकप्रिय और फेमस गेम होने के साथ ही यह करियर बनाने का एक शानदार अवसर भी साबित हो रहा है। क्या आप पैराग्लाइडिंग में करियर बनाने की सोच रहे हैं तो आइए जानते हैं पैराग्लाइडिंग के बारे में संपूर्ण जानकारीः

पैराग्लाइडिंग क्या है? (Paragliding kya hai)

पैराग्लाइडिंग नीले आकाश में स्वतंत्र रूप से उड़ने की वो कला है, जिसे हर एडवेंचर प्रेमी अनुभव करना चाहता है, यह खेल पर्यटकों और एडवेंचर प्रेमियों को काफी आकर्षित करता है।

पैराग्लाइडिंग जो फ्लाइंग पैराशूट का खेल है काफी एडवेंचर और मनोरंजन से भरा हुआ है जिसे खेलकर हर कोई अपने आप को पक्षियों के समान हल्का महसूस करता है। पैराग्लाइडिंग के साथ-साथ रोमांच से भरपूर सबसे मशहूर खेल फुटबॉल में भी अपना करियर बना सकते है।

पैराग्लाइडिंग आकाश में उड़ान भरने के सबसे सरल रूपों में से एक है और इसमें शामिल होना भी सबसे आसान माना जाता है। यह उन लोगों के लिए एक लोकप्रिय खेल है जो न केवल उड़ान का आनंद लेना चाहते हैं, बल्कि बाहरी और अद्भुत ऊपरी दृश्यों का भी आनंद लेना चाहते हैं।

इस खेल में हवा में उड़ने से ज्यादा हवा से बात करने और हवा को समझने की जरूरत होती है। यदि ऐसा नहीं किया जाए तो कुछ पल का रोमांच खतरनाक भी साबित हो सकता है।

इस रोमांचक खेल में उड़ान भरने से लेकर लैंडिंग तक हवा का काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है। हवा की दिशा और गति आपके खेल और मनोरंजन की गति को तय करती है।

भारत में पैराग्लाइडिंग काफी मशहूर हो रही है। भारतीय युवा इस खेल को एंटरटेनमेंट के उद्देश्य से बहुत पसंद भी कर रहे हैं और इसका उपयोग करके पैसे भी कमा रहे हैं।

पैराग्लाइडिंग का इतिहास

पैराग्लाइडिंग आज भले ही बहुत प्रसिद्ध खेल माना जाता हो लेकिन इसकी शुरुआत बहुत पुरानी नहीं है।

इस खेल के बारे में पहली बार कब सोचा गया था, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी शुरुआत पचास के दशक में मानी जा सकती है।

1952 में अमेरिका के डोमिना जाल्बेर्ट (Domina Jalbert) ने पैराशूट की मदद से ग्लाइडिंग का प्रयोग किया था।

इसके बाद कई दिमाग इस दिशा में काम करने लगे और जल्द ही ग्लाइडिंग का खेल लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगा।

डोमिना जाल्बेर्ट (Domina Jalbert) ने 1963 में पैराफोइल बनाए और इसे अपने नाम पेटेंट करा लिया।

कुछ साल बाद डेविड बैरिश नाम के एडवेंचर फ्रीक ने सेल विंग को ईजाद किया और 1965 में न्यूयॉर्क के हंटर माउंटेन पर उसका  सफल परीक्षण कर दिया।

साठ के दशक के प्रारंभ में नासा ने पैराग्लाइडर नाम तलाशा और सतर के दशक में पैराग्लाइडिंग शब्द काम में लिया गया।

अस्सी  के दशक में पैराग्लाइडिंग के इक्विपमेंट्स (उपकरण) पर काम शुरू हुआ और तभी से इनमें सुधार का सिलसिला बरकरार है।

पैराग्लाइडिंग सफर के दौरान ध्यान रखने योग्य बातेः

इस खेल का आनंद लेने के लिए याद रखने योग्य मंत्र है – सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। इसलिए, पायलट को पूरे सफर के दौरान सचेत रहना होता है।

मौसम साफ होना चाहिए, अगर मौसम खराब होने की आशंका हो तो फ्लाइट को कैंसिल कर देना ही बेहतर है।

शुरुआत में कभी भी अकेले पैराग्लाइडिंग यात्रा या सफर पर न जाएं, अपने साथ एक पैराग्लाइडिंग एक्सपर्ट रखें।

उड़ान भरते और उतरते समय अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर हवा बहुत तेज है, तो टेक-ऑफ और लैंडिंग दोनों खतरनाक हो सकते हैं।

आपकी सुरक्षा और बेहतर एडवेंचर के लिए बेहतर है कि बारिश या बर्फबारी में पैराग्लाइडिंग ना करें।

पहाड़ी, झाड़ीदार, ऊबड़-खाबड़, बीहड़ इलाकों में लैंडिंग सुरक्षित नहीं होती है इसलिए सुरक्षित जगह पर लैंड करने की कोशिश करें।

पैराग्लाइडिंग में आवश्यक उपकरण

पैसे कमाने और मनोरंजन के उद्देश्य से पैराग्लाइडिंग खेल एक संपूर्ण खेल है। इसमें प्रयुक्त होने वाले मुख्य उपकरणों की चर्चा नीचे की जा रही है। अगर आप कहीं हिल स्टेशन जाते हैं तो आपको इस गेम का लुत्फ जरूर उठाना चाहिए।

पैराग्लाइडिंग विंग (Paragliding Wing)

पैराग्लाइडर  विंग की मदद से हवा में उडा़ जाता है। विशेष फैब्रिक कपड़े से बने इन विंग्स की चौड़ाई 220 से 380 स्क्वायर फीट होती है, जबकी इनका वजन 3-7 किग्रा तक होता है।

हारनेस (Harness)

ग्लाइडिंग करने वाले व्यक्ति के लिए ग्लाइडर में एक टोकरी होती है जिसे हार्नेस कहते हैं। असफल टेकऑफ़ या उबड़-खाबड़ लैंडिंग की स्थिति में हार्नेस सुरक्षा प्रदान करते हैं।

वैरियोमीटर, जीपीएस (Variometer, GPS)

ग्लाइडिंग के दौरान मौसम की जानकारी प्राप्त करने के लिए वैरियोमीटर के साथ जीपीएस रखा जाता है, जिसके जरिए हवा की गति और दिशा, उसके तापमान, स्थान आदि को ट्रैक किया जाता है।

रेडियो (Radio)

प्रशिक्षण और ग्लाइडिंग के दौरान पायलट रेडियो की मदद से बेसकैंप को अपनी स्थिति की जानकारी देता रहता है। यदि पायलट हवा की गति के कारण दिशा खो देता है, तो वह केवल रेडियो की मदद से मदद मांग सकता है।

रिजर्व पैराशूट (Reserve Parachute)

आजकल ज्यादातर पैराग्लाइडिंग पायलट रिजर्व पैराशूट के साथ उड़ान भरते हैं। हालाँकि इसका उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब पायलट को पूरा यकीन हो कि वे पैराग्लाइडर पर नियंत्रण हासिल नहीं कर सकते हैं।

पैराग्लाइडिंग खेल की बारीकियां कैसे और कहाँ से सीखें?

पैराग्लाइडिंग पायलट बनने के लिए आपको स्पेशल कोर्स करना होगा। यह तीन लेवल का होता है – पी वन लेवल,  पी टू लेवल, पी थ्री लेवल। कई बड़े शहरों में पैराग्लाइडिंग संस्थान हैं जहां से आप इस खेल की बारीकियां सीख सकते हैं।

पी वन लेवल

  • यह एक बेसिक कोर्स है जो विशेष रूप से फ्रेशर्स के लिए बनाया जाता है।
  • इसमें पैराग्लाइडर हैंडलिंग, ग्राउंड हैंडलिंग, सेफ्टी फीचर्स के बारे में तकनीकी जानकारी दी जाती है।
  • यह कोर्स मुख्य रूप से 5-7 दिनों की अवधि का होता है।
  • कोर्स के दौरान आपको कम ऊंचाई पर हवा में उड़ने का मौका मिलता है।
  • इसका कुल खर्च करीब 12-15 हजार रुपये होता है।

पी टू लेवल

  • यह एक बेसिक से एडवांस लेवल का कोर्स होता है।
  • यह कोर्स औसत दर्जे के खिलाड़ियों के लिए बनाया जाता है।
  • इसमें टेक ऑफ, ऊंचाई पर उड़ान और लैंडिंग की उन्नत (एडवांस) तकनीक सिखाई जाती है।
  • यह कोर्स मुख्य रूप से 7-10 दिनों की अवधि का होता है।
  • इसका कुल खर्च करीब 15-20 हजार रुपये होता है।

पी थ्री लेवल

  • पैराग्लाइडर्स को एडवांस टेक्नोलॉजी सिखाने के लिए यह एक एडवांस्ड लेवल का कोर्स होता है।
  • इस स्तर तक पहुंचने के लिए पैराग्लाइडिंग पायलटों का हवाई समय और उड़ानों की संख्या बहुत महत्वपूर्ण है।
  • इस कोर्स के लिए आपके पास कम से कम 25-30 उड़ानों का अनुभव होना आवश्यक है।
  • यह कोर्स मुख्य रूप से 12-20 दिनों की अवधि का होता है।
  • इसका कुल खर्च करीब 30-50 हजार रुपये होता है।

पैराग्लाइडिंग में करियर के अवसर

  • पैराग्लाइडिंग पायलट
  • पैराग्लाइडिंग ग्रुप लीडर
  • पैराग्लाइडिंग कंपनी जॉब
  • देश के लिए मेडल लाना
  • अपना स्वयं का फ्लाइंग ग्रुप
  • पैराग्लाइडिंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट
  • पैराग्लाइडिंग इंस्टक्टर/प्रशिक्षक

पैराग्लाइडिंग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बिना उचित प्रशिक्षण के किसी को भी अकेले ग्लाइडिंग करने की अनुमति नहीं होती है।

प्रत्येक पैराग्लाइडर को उड़ान शुरू करने से पहले विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है और प्रॉपर तरीके से ट्रेनिंग लेनी होती है। आप अपना करियर स्क्रीनप्ले राइटिंग में भी बना सकते है।

एक कुशल पैराग्लाइडर के रूप में यह सुनिश्चित करना सबसे अच्छा है कि आपके पास पर्याप्त प्रशिक्षण है और आप कठिन परिस्थितियों को संभाल सकते हैं या उनसे पूरी तरह बच सकते हैं।