राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है और इसकी नीति

केंद्रीय कैबिनेट ने 04 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) को मंजूरी दी। मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक हब बनाना है। हरित हाइड्रोजन मिशन भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को अकार्बनिक (डीकार्बोनाइजेशन) बनाने में मदद करेगा।

4 जुलाई, 2021 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन” की शुरुआत की गई थी। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, कुल 19,744 करोड़ रुपये के प्रारंभिक बजट के साथ, 4 जनवरी 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लॉन्च किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ एक एनर्जी हब बनाना है।

ग्रीन हाइड्रोजन के लिए पहली वित्तीय प्रतिबद्धता हाल ही में घोषित की गई है और रणनीति का ब्योरा अभी तक सामने नहीं आया है, इसके बावजुद भी कंपनियां व बिजनेस पहले से ही इसके लिए तैयारी कर रही हैं। हरित हाइड्रोजन एक वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है, विशेष रूप से जब दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है और जलवायु परिवर्तन का खतरा वास्तविकता में बदलता दिख रहा है।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है? (Green Hydrogen kya hai)

हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है लेकिन, शुद्ध तथा तात्विक हाइड्रोजन की मात्रा बहुत कम उपलब्ध है। यह लगभग हमेशा ऑक्सीजन के साथ H2O या पानी बनाने जैसे यौगिकों में मौजूद होता है।

जब विद्युत धारा को पानी से गुजारा जाता है, तो यह इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से इसे मौलिक ऑक्सीजन व हाइड्रोजन में विभाजित कर देता है। जब इस प्रक्रिया के लिए उपयोग की जाने वाली बिजली पवन या सौर जैसे नवीकरणीय स्रोत से आती है तो इस प्रकार उत्पादित हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है।

हाइड्रोजन से जुड़े रंग हाइड्रोजन अणु को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त बिजली के स्रोत को इंगित करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोयले का उपयोग किया जाता है, तो इसे ब्राउन हाइड्रोजन कहा जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन ही क्यों?

ग्रीन हाइड्रोजन लगभग शून्य उत्सर्जन के साथ ऊर्जा के सबसे स्वच्छ स्रोतों में शामिल है। प्रति यूनिट वजन में उच्च ऊर्जा सामग्री के कारण यह ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है। सबसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में से एक, ग्रीन हाइड्रोजन में लगभग कोई उत्सर्जन नहीं होता है।

ग्रीन हाइड्रोजन को रॉकेट ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इस्पात और उर्वरकों के उत्पादन के साथ-साथ ऑटोमोबाइल के लिए ईंधन कोशिकाओं जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

हरित हाइड्रोजन क्षमता विकसित करने के लिए दुनिया भर में कई प्रयास किए जा रहे हैं और वैज्ञानिक अपना दिमाग खफा रहे हैं कि कैसे ग्रीन हाइड्रोजन को सामान्य ऊर्जा गतिविधियों में शामिल किया जाए और आमजन को फायदा पहुंचाया जाए क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)

ग्रीन हाइड्रोजन के बढ़ते ट्रैंड को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने भी एक बड़ा फैसला किया है और ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल सामान्य ऊर्जा गतिविधियों के लिए भी किये जाने का निर्णय किया है। इसके तहत सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की लॉन्चिंग की है जो आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय जनता के लिए वरदान साबित होने वाला है।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुसार, 2030 तक, भारत अतिरिक्त 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ-साथ कम से कम 5 मीट्रिक टन सालाना हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता पैदा करेगा। मिशन ग्रीन हाइड्रोजन की मांग निर्माण, उत्पादन, उपयोग और निर्यात की सुविधा प्रदान करेगा।  

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत, लगभग छह लाख नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है, जिसके लिए कुल 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी। इस प्रोजेक्ट के तहत कई युवाओं को रोजगार मिलेगा और भारतीय इकोनॉमी को बूस्टर डोज मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, इसके परिणामस्वरूप जीवाश्म ईंधन के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संचयी कमी के साथ-साथ वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 मीट्रिक टन की कमी आएगी।

  • ग्रीन हाइड्रोजन मिशन प्रोजेक्ट का कुल बजट 19,744 करोड़ रुपये रखा गया है।
  • 17,490 करोड़ रुपये ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण और इलेक्ट्रोलाइज़र के निर्माण में खर्च किए जाएंगे।
  • पायलट प्रोजेक्ट के लिए अतिरिक्त 1,466 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।
  • 400 करोड़ रुपये का उपयोग अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) में किया जाएंगा।
  • 388 करोड़ रुपये का उपयोग अन्य मिशन घटकों के लिए किया जाएगा।

ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन प्रोग्राम (SIGHT) के तहत, दो अलग-अलग वित्तीय प्रोत्साहन तंत्र – 1. इलेक्ट्रोलाइजर के घरेलू निर्माण और 2. ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को लक्षित किया जाएगा और बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन के उपयोग का समर्थन करने में सक्षम क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और उन्हें ग्रीन हाइड्रोजन हब (Green Hydrogen Hub) के रूप में विकसित किया जाएगा।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन सरकार की पहल

  • प्रत्येक घटक के निष्पादन के निर्देश Ministry of New and Renewable Energy (MNRE)) द्वारा विकसित किए जाएंगे।
  • भारत में हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक सक्षम नीतिगत ढांचा तैयार किया जाएगा।
  • मिशन अनुसंधान और विकास (रणनीतिक हाइड्रोजन नवाचार भागीदारी – SHIP) के लिए एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी ढांचे की सुविधा प्रदान करेगा।
  • लक्ष्य-उन्मुख, समयबद्ध और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीकों को विकसित करने के लिए अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को उपयुक्त रूप से बढ़ाया जाएगा।
  • मिशन के तहत एक एकीकृत कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाया जाएगा।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के सभी संबंधित मंत्रालय और विभाग मिशन के उद्देश्य की सफलता सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कदम उठाएंगे।
  • मिशन के समग्र समन्वय और कार्यान्वयन के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New & Renewable Energy) जिम्मेदार होगा।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लाभ

  • ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव के लिए निर्यात अवसरों का सृजन करना।
  • औद्योगिक, गतिशीलता और ऊर्जा क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन करना।
  • आयातित जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) और फीडस्टॉक पर निर्भरता को कम करना।
  • स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन उर्जा विनिर्माण क्षमताओं का विकास करना।
  • भारत में उर्जा क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का सृजन करना।
  • ऊर्जा के क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी का विकास करके भारत को आत्मनिर्भर बनाना।
  • हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता कम से कम 5 एमएमटी प्रति वर्ष करना।

यदि भारत सरकार की हरित हाइड्रोजन ऊर्जा पहल सफल होती है तो आने वाले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने वाला है और हम सभी को पर्यावरण प्रदूषण से 50 से 70% तक मुक्ति मिलने की संभावना है। तो आइए हम भी भारत सरकार की इस अद्भुत पहल का हिस्सा बनें और इस ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी मिशन को सफल बनाने में अपना योगदान दें।