भारत में ग्रीन बैंकिंग

क्या आपने हरित बैंकिंग या ग्रीन बैंकिंग शब्द के बारे में सुना है? यदि नहीं, तो इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको ग्रीन बैंकिंग क्या है, भारत में ग्रीन बैंकिंग की भूमिका, ग्रीन बैंकिंग के लाभ, ग्रीन बैंकिंग की परिभाषा आदि के बारे में बताने जा रहे हैं। लगभग सभी बैंक्स और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट हरित बैंकिंग (Green Banking) को बढ़ावा दे रहे हैं।

हरित बैंकिंग क्या है या ग्रीन बैंकिंग क्या है?

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के अनुसार ग्रीन बैंक एक सामान्य बैंक की तरह है, जो पर्यावरण की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से सभी सामाजिक और पर्यावरणीय/पारिस्थितिक कारकों पर विचार करता है। इसे एथिकल बैंक या सस्टेनेबल बैंक के रूप में भी जाना जाता है।

पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और जिम्मेदार संस्थानों को बढ़ावा देकर बैंक पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह के बैंक को “ग्रीन बैंकिंग” कहा जाता है। ऑन-लाइन बैंकिंग ग्रीन बैंकिंग का एक शानदार उदाहरण है। भारत में भी प्रमुख भारतीय बैंक ग्रीन बैंकिंग प्रणाली को अपनाते है।

2009 में फ्लोरिडा राज्य में ग्रीन बैंकिंग की शुरुआत की गई थी। भारत में, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने हरित बैंकिंग पहल की दिशा में पहला कदम उठाया। ग्रीन बैंकिंग बैंकिंग के व्यवसाय में टेक्नोलॉजी के संयोजन, परिचालन सुधार और ग्राहकों की बदलती आदतों और जरूरतों का प्रतीक है।

हरित बैंकिंग पद्धतियों को अपनाने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि इससे लागत में कमी आती है, कम धोखाधड़ी व गलतियां होती है, बैंकों की गतिविधियों में अधिक परिचालन दक्षता बढ़ती है, जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत होने के साथ बहुत आवश्यक है।

भारत में ग्रीन बैंकिंग का मतलब

ग्रीन बैंकिंग या हरित बैंकिंग का अर्थ दैनिक बैंकिंग गतिविधियों से कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

ग्रीन बैंकिंग एक सामान्य बैंक की तरह होती है, जो सभी सामाजिक और पर्यावरणीय कारकों पर विचार करता है; इसे एथिकल बैंकिंग भी कहा जाता है।

पर्यावरण की रक्षा के उद्देश्य से ग्रीन बैंकिंग या हरित बैंकिंग की शुरुआत की गई है। ये बैंक एक सामान्य बैंक की तरह काम करते हैं और एक पारंपरिक बैंक के समान ही अधिकारियों द्वारा नियंत्रित होते हैं।

जैसे – 1. ऑनलाइन बिलों का भुगतान करना, 2. शाखा बैंकिंग के बजाय ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करना, 3. बैंकिंग पेपर वर्क कम करना, 4. बैंकों में व्यवस्थित रूप से लेनदेन व ट्रांजैक्शन करना, 5. बैंकिंग कैश (Cash) को कम करना, 6. बैंक यूपीआई या ऐप का इस्तेमाल करना, 7. परिचालन लागत कम करना व दक्षता बढ़ाना, 8. ग्राहकों के बीच ऑनलाइन बैंकिंग के उपयोग को बढ़ावा देना मुख्य रूप से शामिल है।

वित्तीय दुनिया में ग्रीन बैंकिंग एक नई घटना है। ग्रीन बैंकिंग वह शब्द है जिसका इस्तेमाल बैंकों द्वारा उन्हें पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए किया जाता है। ये बैंक पर्यावरणीय कारकों को अधिक महत्व देते हैं, उनका उद्देश्य अच्छा पर्यावरण और साफ-सुथरी बैंकिंग गतिविधियां प्रदान करना है।

विदेशी बैंक बहुत ज्यादा ग्रीन बैंकिंग प्रोजेक्ट पर अभ्यास कर रहे हैं। भारतीय बैंक अभी भी धीरे-धीरे बैंकिंग के इस नए रूप पर काम कर रहे हैं। हालांकि, उनमें से कई सक्रिय रूप से इस रणनीति को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं।

ग्रीन बैंकिंग बैंकों को पर्यावरण के अनुकूल निवेश को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण के लिए समर्पित उद्योगों को ऋण देने को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश ग्रीन बैंकिंग को अपनाने की ओर अग्रसर है।

ये ऋण देने से पहले सभी कारकों की जांच करते हैं, क्या परियोजना पर्यावरण के अनुकूल है, आपको ऋण तभी दिया जाएगा जब आप सभी पर्यावरण सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे।

ग्रीन बैंकिंग: वित्तीय उत्पाद और सेवाएं (Financial Products and Services)

विभिन्न बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट ग्रीन बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए अपने कई वित्तीय उत्पाद और सेवाएं पेश करते हैं। जिनमें से मुख्य रूप से नीचे बताई गई वित्तीय सेवाएं शामिल है।

मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन बैंकिंग

ऑनलाइन बैंकिंग में कम कागजी कार्रवाई, कम धोखाधड़ी और बैंक ग्राहकों द्वारा शाखा कार्यालयों का कम दौरा शामिल है, इन सभी का पर्यावरण पर सकारात्मक और अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

ग्रीन लोन (Green Loan)

ग्रीन लोन का अर्थ है किसी ऐसे प्रोजेक्ट या व्यवसाय को लोन देना जिसे पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ माना जाता है और जो सभी पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन करता है।

ग्रीन मॉर्टगेज (Green Mortgage)

ग्रीन मॉर्टगेज बंधक के प्रकार को संदर्भित करता है। आम तौर पर, ग्रीन होम मॉर्गेज को एनर्जी एफिशिएंट मॉर्गेज (EEM’S) कहा जाता है। यह ग्रीन बैंकिंग प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए अनुकरणीय प्रयास है।

ग्रीन क्रेडिट व डेबिट कार्ड (Green Credit/Debit Cards)

पर्यावरण के अनुकूल पुरस्कार के रूप में, बायोडिग्रेडेबल क्रेडिट व डेबिट कार्ड सामग्री का उपयोग करने या पेपरलेस बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए ग्रिन क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड का उपयोग किया जाता है।

ग्रीन सेविंग अकाउंट (Green Savings Account)

ग्रीन सेविंग अकाउंट को पेपरलेस हरित बैंकिंग को बढ़ावा देने के सर्वोत्तम प्रयासों में से एक माना जाता है। ग्राहक जितना अधिक बचत करते हैं, बैंकों द्वारा किए गए योगदान के रूप में पर्यावरण को उतना ही अधिक लाभ होता है।

ग्रीन बैंकिंग के लाभ (Benefits of Green Banking)

कम कागजी कार्रवाईलागत में कटौती
उत्पादकता में वृद्धिबैंकिंग नकद को कम करना
लाभप्रदता में सुधारपरिसंपत्ति देयता प्रबंधन करना
कम जोखिमों का सामना करनाऑनलाइन जमा व भुगतान करना
पर्यावरण के बारे में बिजनेस जागरूकतातुलनात्मक रूप से कम दरों पर ऋण
उधार के लिए पर्यावरण मानकबैंकिंग सेवा मानकों में सुधार
मैनुअल कार्यों का स्वचालनलाभप्रदता और बिक्री में वृद्धि
नॉन-परफॉर्मिंग ऐसेट (NPA) में सुधारऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करना
ग्रीन बैंकिंग गतिविधियां बढ़ानाब्याज दरों में परिवर्तन का प्रबंधन करना
विदेशी विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव को संभालनानियामकों की आवश्यकताओं का पालन करना
ग्राहक सेवा में सर्वोत्तम संतुष्टि प्रदान करनादेश की अर्थव्यवस्था में योगदान करना

भारत में हरित बैंकिंग पहल (Green Banking Initiatives in India)

भारत सरकार ने ग्रीन बैंकिंग इनिशिएटिव के लिए बैंकों और फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट्स को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए सभी केंद्रीकृत, क्षेत्रीय ग्रामीण और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कहा गया है किः

  • इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियों का उपयोग बढ़ाया जाएं।
  • सीबीएस (कोर बैंकिंग सॉल्यूशन) का उपयोग बढ़ाया जाएं।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएं।
  • ग्राहक अपनी बैंकिंग गतिविधियों का ऑनलाइन सॉल्यूशन करें।
  • आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी केंद्रीकृत भुगतान प्रणालियों की पेशकश करें।

पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार और बैंकिंग इंस्टीट्यूट के द्वारा ग्रीन बैंकिंग की पहल की गई है जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी बात है। निश्चित रूप से, आने वाले समय में सभी वित्तीय संस्थान इस ग्रीन बैंकिंग प्रणाली को अपनाकर अपने ग्राहकों को बेस्ट सर्विस देने की कोशिश करेंगे और भारतीय अर्थव्यवस्था में जबरदस्त योगदान करने की कोशिश करेंगे।