फाइनेंस के प्रकार (वित्त के प्रकार) – पर्सनल, कॉर्पोरेट व पब्लिक फाइनेंस

फाइनेंस एक बहुत विस्तृत टॉपिक है, जिसके बारे में हम सभी को जाने अनजाने में कुछ नॉलेज होता है लेकिन हम उसे प्रॉपर तरीके से वर्णिक नहीं कर पाते। क्या आप जानते हैं कि फाइनेंस के कितने प्रकार होते हैं और इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि वित्त के प्रकार क्या है, Types of Finance in Hindi, फाइनेंस के प्रकार क्या है और फाइनेंस कितने प्रकार का होता है आदि।

वित्त यानी फाइनेंस को धन के प्रबंधन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें धन से संबंधित सभी गतिविधियाँ शामिल होती हैं। वित्त मुख्यतः तीन प्रकार का होता है- व्यक्तिगत वित्त, निगमित वित्त, सार्वजनिक वित्त।

फाइनेंस के ये तीनों प्रकार मिलकर किसी देश की मजबुत वित्तीय स्थिति का वर्णन करते हैं। आपको धन का उचित प्रबंधन करने और बिजनेस व जॉब अपॉर्चुनिटी प्राप्त करने के लिए फाइनेंस क्या है और फाइनेंशियल सेक्टर में विभिन्न अवसर के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

फाइनेंस के प्रकार व वित्त के प्रकार (Types of Finance in Hindi)

फाइनेंस को पैसों वाला सेक्टर कहा जाता है। जहां, केवल और केवल धन से संबंधित बातें होती हैं। फाइनेंस के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते है। जिसके माध्यम से पूरे देश की अर्थव्यवस्था चलती है और ये तीनों प्रकार जितने मजबूत होगे उतनी उस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। तो आइए, वित्त यानी फाइनेंस के मुख्य प्रकारों (Types of Finance) के बारे में जानते हैं।

पर्सनल फाइनेंस (व्यक्तिगत वित्त)

आपके पैसों को मैनेज करने की गतिविधियों को पर्सनल फाइनेंस (व्यक्तिगत वित्त) कहते है। इसमें आपकी बचत, निवेश या खर्चों से संबंधित गतिविधियां शामिल है। इसमें बजट, बैंकिंग, बीमा, बंधक, निवेश, किसी से उधार लेना, किसी को उधार देना, सेवानिवृत्ति योजना, कर और संपत्ति योजना शामिल हैं।

पर्सनल फाइनेंस व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रॉपर प्लानिंग होती है। चाहे वह किसी व्यक्ति की शॉर्ट टर्म वित्तीय आवश्यकता हो या लॉन्ग टर्म, इनको प्रॉपर प्लानिंग के साथ मैनेज करना ही पर्सनल फाइनेंस कहलाता है।

यह व्यक्ति को व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय लेने में मदद करता है ताकि व्यक्ति अपना गुजारा चलाने के लिए कहीं से इनकम प्राप्त कर सके और उस इनकम को सही तरीके से प्लान कर अपना अच्छे से गुजारा कर सकें।

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आज बाजार में पर्सनल फाइनेंस से संबंधित कई प्रकार के बिजनेस और रोजगार उपलब्ध हो गए हैं जिसमें पर्सनल फाइनेंस से संबंधित सलाह देना, फंड मैनेज करना, लोगों को प्रॉपर प्लानिंग के साथ फंडिंग दिलाना शामिल है। आप कहीं पर भी नौकरी कर सकते हैं या अपना खुद का बिजनेस शुरू करके इस प्रकार की सर्विस लोगों को दे सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति पूरी प्लानिंग के साथ अपनी बचत का उपयोग नहीं करता है तो वह व्यक्ति भविष्य में बहुत मुश्किल में पड़ सकता है इसीलिए हर व्यक्ति को पर्सनल फाइनेंस की जरूरत को ध्यान में रखकर सही तरीके से योजना बनाकर अपने पैसों का उपयोग करना चाहिए और अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए।

कॉर्पोरेट फाइनेंस (निगमित वित्त)

कॉर्पोरेट फाइनेंस से तात्पर्य किसी व्यवसाय को शुरु करने, उसको ग्रो करने और किसी बिजनेस को अधिग्रहण करने के लिए पूंजी जुटाने और उस पूंजी को प्रॉपर प्लानिंग करके निवेश करने से संबंधित गतिविधियों और अन्य वित्तीय लेनदेन से है।

इसमें कंपनी का बजट, बैंकिंग गतिविधियां, बीमा, निवेश, फंडिंग प्राप्त करना, उस फंडिंग की प्रॉपर प्लानिंग करना और उचित जगह पर खर्च करना या निवेश करना, कर और संपत्ति योजना शामिल हैं।

कॉरपोरेट फाइनेंस एक बड़ी टर्म है जिसमें उन सभी कंपनियों और कॉरपोरेट्स के वित्तीय लेनदेन शामिल है जो लोगों की सेवा के लिए उपस्थित है। इसमें वे सभी वित्तीय ट्रांजैक्शन आते हैं जो किसी कंपनी को चलाने के लिए आवश्यक है। फाइनेंस का यह प्रकार किसी भी अर्थव्यवस्था की आधारशिला माना जाता है।

ज्यादातर मात्रा में कॉरपोरेट्स इक्विटी और डेट के माध्यम से फंडिंग प्राप्त करते हैं और इस फंडिंग को अपने लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म गोल प्राप्त करने के लिए उपयोग करते है।

कॉरपोरेट फाइनेंस पर्सनल फाइनेंस की तरह ही होता है, लेकिन इसमें बहुत बड़ी मात्रा में लेनदेन किये जाते है और ये लेनदेन बहुत बड़े अमाउंट में होते है, इस कारण यह पर्सनल फाइनेंस से बिल्कुल अलग माना जाता हैं।

कॉरपोरेट फाइनेंस कॉरपोरेट्स को निर्णय लेने में मदद करता है कि पैसे कहां से अरेंज किए जाए और कहां पर निवेश किए जाने हैं और भविष्य में यह निवेश कितना रिटर्न प्रदान करेगा।

यह बिजनेस को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। बिजनेस को एक्सपेंड करने और बड़ा करने में मदद करता है। यह रिसर्च एंड डेवलपमेंट में मदद करता और रिस्क मैनेजमेंट करता है कि कहीं कोई बड़ी हानि हो जाए तो पैसे कहां से अरेंज होगे।

पब्लिक फाइनेंस (सार्वजनिक वित्त)

सरकार द्वारा देश को चलाने के लिए की गई वित्तीय गतिविधियों को पब्लिक फाइनेंस कहते है। इसमें सरकारी बचत, निवेश या खर्चों से संबंधित गतिविधियां शामिल है।

इसमें बजट, बैंकिंग, बीमा, बंधक, निवेश, लोन देना, लोन लेना, लोन माफ करना, परोपकार के लिए पैसे खर्च करना, सरकार को दान के रूप में पैसे मिलना, सरकारी आय व सभी खर्चे शामिल हैं।

पब्लिक फाइनेंस सरकारी संस्थाओं से संबंधित वित्तीय लेनदेनों का अध्ययन है। सार्वजनिक वित्त किसी भी स्तर पर सरकारी इकाई की आय और व्यय से संबंधित है, चाहे वह केंद्रीय, राज्य या स्थानीय हो। इस प्रकार के फाइनेंस में कर, खर्च, बजट और ऋण जारी करने की नीतियां शामिल हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की टॉप कंपनियां स्टॉक मार्केट में लिस्टेड होती है और स्टॉक मार्केट में विभिन्न प्रकार के निवेशक अपना पैसा निवेश करते हैं, जिससे इन कंपनियों को लोगों से पैसा मिलता है और कुछ समय बाद पैसा लगाने वाले इन निवेशकों को रिटर्न के रूप में कमाई होती है।

सरकार संसाधनों के आवंटन, आय के वितरण और आर्थिक स्थिरता की देखरेख करके बाजार की विफलता को रोकने में मदद करती है। पब्लिक फाइनेंस में सरकार बजट के माध्यम से अपनी कमाई के बारे में बताती है और इस कमाई को कहां पर खर्च किया जाएगा इसके बारे में भी बताती है।

सरकार की ज्यादातर कमाई कराधान के माध्यम से होती है। बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य राष्ट्रों से उधार लेना भी सरकार के खर्च में मदद करता है। इसमें देश के राष्ट्रीय बजट, केंद्रीय बैंक, रिपॉजिटरी विभाग और सरकार के अन्य स्तरों का प्रबंधन शामिल है।

सरकार जनता से कर के रूप में राजस्व एकत्र करती और राष्ट्रीय कर्तव्यों और अन्य कार्यक्रमों जैसे कि सड़क बनाने, अस्पताल बनाने, सामाजिक सुरक्षा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए उस धन का उपयोग करती है।

ये तीन मुख्य प्रकार के वित्त (Types of Finance in Hindi) होते हैं जो अपने स्तर पर देश की अर्थव्यवस्था में बहुत योगदान करते हैं। वित्त के प्रकारों को ठीक से चलाने और प्रबंधित करने के लिए, सरकार द्वारा एक व्यवस्थित योजना बनाई जाती है जिसका पालन व्यक्तिगत, कॉर्पोरेट और सार्वजनिक वित्तिय क्षेत्रों द्वारा किया जाता है।