एजुकेशन सिस्टम अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?

एजुकेशन और बिजनेस स्किल का कंबीनेशन किसी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और उस देश की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में नए इनोवेशन के माध्यम से लोगों की समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है, इसका बेस्ट उदाहरण हमारे सामने – संयुक्त राज्य अमेरिका है।

क्या आपने कभी सोचा है कि शिक्षित व्यक्ति एक अशिक्षित व्यक्ति की तुलना में इतना अधिक क्यों कमाता हैं?

इसका सीधा उत्तर यह है कि शिक्षित लोग किसी भी कार्य के लिए उचित योजना और अपने सर्वोत्तम कौशल और प्रशिक्षण के साथ शत-प्रतिशत आउटपुट देने का प्रयास करते है। इसलिए, लगभग 95% मामलों में यह देखा गया है कि एक शिक्षित व्यक्ति एक अशिक्षित व्यक्ति से अधिक कमाता है।

एजुकेशन सिस्टम अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?

एजुकेशन डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रूप से किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाती है। किसी देश के लोग अशिक्षित होंगे तो वे वैश्विक बाजार में कंपटीशन नहीं कर पाएंगे और अपना बेस्ट परफॉर्मेंस और सर्विस ग्लोबल मार्केट को नहीं दे पाएंगे।

वे एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग नहीं करने के कारण अन्य देशों के मुकाबले मानसिक और वित्तीय रूप से पिछड़ जाएंगे। अशिक्षा से राजनीतिक और सामाजिक संकट के कारण ग्लोबल मार्केट और कंपनियां उस देश के प्रति बिजनेस करने में इंटरेस्ट नहीं दिखाएंगी।

शिक्षा एक देश की अर्थव्यवस्था को कैसे लाभ पहुंचाती है?

वैश्वीकरण और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए सभी देशों को एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है जिसके कारण एजुकेशन, ट्रेनिंग और बिजनेस स्किल उस देश के नौजवानों में होनी चाहिए।

आर्थिक रूप से सफल देश अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिस्पर्धी और तुलनात्मक रूप से दबाव बनाते है। जिनके उदाहरण हम आए दिन अखबारों और न्यूज़ चैनल में देखते हैं।

किसी देश के कार्यबल की शिक्षा, अनुभव, आत्मविश्वास, बिजनेस स्किल्स व प्रशिक्षण यह निर्धारित करने में एक प्रमुख कारक है कि उस देश की अर्थव्यवस्था कितना अच्छा प्रदर्शन करेगी।

एक सफल शिक्षित-प्रशिक्षित अर्थव्यवस्था में एक ऐसे स्तर पर उद्योगों को संचालित करने में सक्षम कार्यबल होता है जहां अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका प्रतिस्पर्धात्मक लाभ होता है। प्रशिक्षण स्तरों में अंतर एक महत्वपूर्ण कारक है जो विकसित और विकासशील देशों को अलग करता है।

एक अच्छी तरह से प्रशिक्षित और शिक्षित कार्यबल का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। परिणामस्वरूप, समान भौगोलिक क्षेत्र में कुशल श्रमिकों के कारण समान व्यवसाय क्लस्टर हो सकते हैं।

कई देशों ने ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करने पर अधिक जोर दिया है जो विज्ञान, मैनेजमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व विभिन्न एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे नए उद्योगों में काम करने में सक्षम श्रमिकों का उत्पादन कर सके।

अगर किसी देश के नौजवान शिक्षित होगे तो वहां पर आंदोलन कम होंगे और बेवजह का टकराव बहुत कम होने के कारण वहां शांति बनी रहेगी जिससे अल्टीमेटली अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।

सामाजिक और राजनीतिक संकट भी कम होंगे और सभी लोग मिल-जुलकर रहेंगे, जिससे अपराध भी कम होंगे और खुशनुमा माहौल बना रहेगा।

सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी केवल और केवल शिक्षा और बेस्ट बिज़नेस ट्रेनिंग के माध्यम से ही हो सकती है। अगर कोई भी देश अपने बेसिक एजुकेशन सिस्टम पर फोकस नहीं करता है तो वह आने वाले 20 सालों में 200 देशों की सूची में सबसे लास्ट में रहने के लिए तैयार हो जाए।

जीडीपी एक राष्ट्र के लिए वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए, शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का एक उच्च अनुपात खर्च करना और वहां से उत्पादन (आउटपुट) निकालना उस देश की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करता है।

शिक्षा से कार्य क्षमता बढ़ती है और बेहतरीन प्रशिक्षण के कारण अच्छा आउटपुट मिलने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जिससे बड़ी कंपनियों, कॉरपोरेट्स व सरकार को अनावश्यक एंप्लोई रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है और अन्य खर्चे भी बहुत कम करने पड़ते हैं।

जिस देश में जितने हायर एजुकेशन लोग रहते है वहां की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से ग्रो करती है और नई टेक्नोलॉजी का एडवांस में फायदा लेने में सक्षम होते है

भारत भी पिछले 30 साल से इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों को आकर्षित करने के लिए प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा को भी निःशुल्क बनाया गया है और समय-समय पर छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिभा के आधार पर छात्रवृत्ति योजना भी चलाई जा रही है।

क्या आप भी एक भारतीय युवा हैं और अर्थव्यवस्था में योगदान देना चाहते हैं तो आज से ही शिक्षा और बेहतरीन बिजनेस ट्रेनिंग पर ध्यान दें। यह नौकरी, व्यवसाय, स्टार्टअप, उद्यमी बनने आदि पैसे कमाने के माध्यम में मदद करेगी।

हमारी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ने के लिए अग्रसर हो रही है और हम विश्व में सबसे यंग देशों की सूची में नंबर वन पर है तो हमें इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए और एडवांस टेक्नोलॉजी को विकसित करके हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था को और ज्यादा बूस्ट करने की आवश्यकता है।