कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम क्या है?

कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम (RBI Card Tokenisation System) व्यवस्था से साइबर फ्रॉड, डेबिट-क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग पर कसेगा शिकंजा। यह टोकनाइजेशन सिस्टम ग्राहक की वित्तीय जानकारी को गोपनीय रखेगा और कई तरह की धोखाधड़ी से बचाएगा।

कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम क्या है? (Card Tokenisation System kya hai)

इस प्रणाली के तहत पेमेंट के लिए डेबिट-क्रेडिट कार्ड की डिटेल जैसे कार्ड नंबर, कार्ड धारक का नाम, कार्ड एक्सपायरी डेट व सीवीसी नंबर आदि देने के बदले 4 या 6 अंक का एक यूनिक टोकन नंबर जारी होगा जिससे सभी लेनदेन जैसे खरीदारी, पेमेंट आदि किए जा सकेंगे।

टोकन सिस्टम के तहत कार्ड नेटवर्क जैसे वीजा, मास्टरकार्ड और रुपे के जरिए नया टोकन नंबर जारी किया जाएगा। कुछ बैंक कार्ड नेटवर्क को टोकन जारी करने से पहले बैंक की मंजूरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

यह कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम ग्राहक की वित्तीय जानकारी को गोपनीय रखेगा और कोई भी मर्चेंट आपके कार्ड डिटेल को सेव नहीं कर पाएगा। मर्चेंट के पास सिर्फ आपका टोकन जाएगा जिससे आपकी सारी डिटेल गोपनीय रहेगी।

ग्राहकों को कॉन्टैक्टलेस, क्यूआर कोड या इन-ऐप परचेज जैसी किसी भी सेवा के लिए खुद को रजिस्टर या डी-रजिस्टर करने का अधिकार होगा।

इस नए टोकन सिस्टम से अब ऑनलाइन शॉपिंग ज्यादा सुरक्षित होगी। डेबिट-क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर सख्ती होगी।

कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम कैसे काम करता है?

  • कार्ड विवरण मर्चेंट प्लेटफ़ॉर्म-पेमेंट गेटवे पर सहेजा नहीं जाएगा।
  • खरीदारी के लिए कार्ड विवरण के बजाय 4 या 6 अंकों का सुरक्षित टोकन नंबर देना होगा।
  • हर प्लेटफॉर्म से प्रत्येक खरीदारी के लिए अलग टोकन नंबर देना होगा।
  • ग्राहक ऐप से जनरेट यूनिक टोकन नंबर पेमेंट के लिए एंटर करेंगे।
  • मर्चेंट प्लेटफॉर्म इसे अधिग्रहणकर्ता बैंक को भेजेगा।
  • फिर बैंक, टोकन को कार्ड नेटवर्क को भेजेंगे।
  • टोकन का डाटा बैंक के वॉलेट में सुरक्षित रहेगा।
  • फिर इसे, जारीकर्ता बैंक के पास भेजा जाएगा।
  • टोकन के साथ पेन, अकाउंट नंबर की जानकारी जारीकर्ता बैंक को भेजी जाएगी।
  • जारीकर्ता बैंक पेमेंट की राशि को वेरीफाई करेंगे और ट्रांजैक्शन को मंजूरी देंगे।

कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम के फायदे

  • स्टोर संचालक या कोई अन्य पेमेंट-गेटवे अपने पास कार्ड की डिटेल स्टोर नहीं कर पाएगा।
  • इस सिस्टम से ग्राहकों की डेटा प्राइवेसी बनी रहेगी।
  • कार्ड का विवरण किसी तीसरे पक्ष के ऐप के साथ साझा नहीं करना होगा।
  • इस प्रणाली से ग्राहकों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम में काफी कमी आएगी।
  • ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार डेली ट्रांजैक्शन लिमिट तय कर सकते हैं।
  • टोकन सिस्टम के तहत, प्रत्येक खरीद के लिए एक अद्वितीय कोड जारी किया जाएगा।
  • आपको लेनदेन के लिए उत्पन्न अद्वितीय टोकन नंबर (unique token number) दर्ज करना होगा।
  • ग्राहक इन-ऐप खरीदारी को किसी भी समय अपंजीकृत कर सकते हैं।
  • ग्राहकों की प्राइवेसी और ट्रांजैक्शन डिटेल सुरक्षित रहेगी।
  • ग्राहकों को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित लेनदेन करने की सुविधा मिलेगी।

क्या पेमेंट गेटवे या अन्य सेवा प्रदाता कार्ड डेटा स्टोर कर पाएंगे?

नहीं, पेमेंट एग्रीगेटर, पेमेंट गेटवे, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या अन्य सेवा प्रदाता कार्ड टोकन सिस्टम की शुरुआत के बाद आरबीआई के निर्देशों के अनुसार डेबिट/क्रेडिट कार्ड डेटा स्टोर नहीं कर सकते हैं।

क्या कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम अनिवार्य है?

आरबीआई द्वारा कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम को अनिवार्य नहीं किया गया है। यह टोकन व्यवस्था ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर करेगी। जो ग्राहक इस विकल्प को नहीं सुनते हैं उन्हें हर बार डेबिट/क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके खरीदारी या भुगतान करने पर पूर्ण कार्ड विवरण दर्ज करना होगा।

कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम का उद्देश्य क्या है?

RBI टोकन प्रणाली का उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर रोक लगाना और ग्राहकों की गोपनीयता बनाए रखते हुए उन्हें सर्वोत्तम वित्तीय लेनदेन अनुभव प्रदान करना है। इस नियम के लागू होने के बाद जब भी क्रेडिट या डेबिट कार्ड से ट्रांजैक्शन किया जाएगा तो पेमेंट कंपनियां ग्राहक के कार्ड का डेटा स्टोर नहीं कर पाएंगी।

क्या कार्ड टोकनाइजेशन सिस्टम पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगेगा?

इस नई टोकन प्रणाली सुविधा का लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ता को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। आप बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस नई सुविधा का आनंद ले सकते हैं और अपने सभी वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित कर साइबर फ्रॉड से बच सकते हैं।