एड एजेंसी कैसे काम करती है?

एक विज्ञापन एजेंसी (Ad Agency) एक दर्जी की तरह होती है। यह विज्ञापन की योजना बनाती है कि इसे कैसे, कब और कहाँ वितरित किया जाना चाहिए। एड प्लेसमेंट व सर्विस के द्वारा, Advertisement Agencies कंपनियों या संगठनों के उत्पादों को बेचने का हर संभव प्रयास करती हैं और उनके लक्षित ग्राहकों तक आसान और सरल तरीके से पहुंचने में मदद करती हैं।

एडवरटाइजिंग के बारे में कहा जाता है कि यह चौबीसों घंटे काम करने वाली इंडस्ट्री है जो बिल्कुल सच है। एडवरटाइजिंग का काम बेहद क्रिएटिव होता है। इसमें शारीरिक कसरत की नहीं बल्कि दिमागी कसरत की जरूरत पड़ती है।

क्लाइंट अपने बिजनेस प्रोडक्ट व सर्विस के लिए विज्ञापन बनवाते हैं चाहे वह टेलीविजन, प्रिंट या डिजिटल मीडिया के लिए हो। ऐड बनवाने के लिए आने वाला क्लाइंट सबसे पहले अपनी जरूरत बताता है जो उसके मार्केट और टारगेट ऑडियंस के मुताबिक होती है।

एड एजेंसी कैसे काम करती है? (Ad Agency Kaise kaam karti hai)

एडवरटाइजिंग को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है 1. क्रिएटिव विभाग व 2. एग्जीक्यूटिव विभाग। यदि क्रिएटिव विभाग एड एजेंसी का दिमाग माना जाता है तो एग्जीक्यूटिव विभाग व क्लाइंट सर्विसिंग उसका दिल माना जाता है।

  1. क्रिएटिव विभाग में कॉपीराइटर, स्क्रिप्टराइटर, विजुअलाइजर, फोटोग्राफर और टाइपोग्राफी शामिल होते है।
  2. एग्जीक्यूटिव विभाग में क्लाइंट सर्विसिंग, मार्केट रिसर्च, मीडिया प्लानिंग व बाइंग शामिल होते है।

एड एजेंसी क्रिएटिव विभाग

रचनात्मक विभाग या क्रिएटिव विभाग एक विज्ञापन एजेंसी की नींव है। यह विभाग विज्ञापन की प्रति तैयार करता है और ग्राहकों की विशिष्ट आवश्यकताओं को शब्दों और दृश्यों का रूप देता है।

क्रिएटिव डायरेक्टर, स्क्रिप्टराइटर, कॉपीराइटर, विजुअलाइजर, आर्ट डायरेक्टर, टाइपोग्राफर, फोटोग्राफर, स्टूडियो आर्टिस्ट, इलस्ट्रेटर, वेब डिजाइनर, डिजिटल व र्थी-डी आर्टिस्ट क्रिएटिव विभाग का हिस्सा होते हैं।

क्रिएटिव डायरेक्टर अपने दिमाग की क्रिएटिविटी के आधार पर विज्ञापन का खाका तैयार करता है और अपने ग्राहक को विज्ञापन की पूरी प्लानिंग, प्रेजेंटेशन और आइडिया के बारे में बताता है।

कॉपीराइटर कैंपेन की थीम को तैयार करते हैं और विज्ञापन का टेक्स्ट लिखते है। वे कैंपेन स्लोगन, जिंगल, स्क्रिप्ट, प्रपोजल्स, कॉन्सेप्ट नोट्स आदि पर काम करते हैं। विज्ञापन के प्रोडक्शन में जाने से पहले वे एडिटिंग का काम भी करते हैं। 

विजुअलाइजर विजुअल कॉन्सेप्ट पर काम करते है और संदेश का पूरा लेआउट तैयार करने के साथ यह तय करते हैं कि आखिरकार विज्ञापन बनने के बाद कैसा लगेगा।

प्रिंट मीडिया में ग्राफिक डिजाइनर होते हैं जो कॉपी लिखे जाने के बाद विज्ञापन का खाका खींचते हैं और आर्ट  डायरेक्टर को रिपोर्ट करते हैं।

आर्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी विजुअल्स की होती हैं जिसके लिए कम्युनिकेशन डिजाइन या फाइन आर्ट्स, अप्लाइड आर्ट्स में कोर्स  करना जरूरी है। फोटोशॉप, कोरल ड्रॉ व अन्य डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर की जानकारी, इलेस्ट्रेशन भी मददगार है।

एड एजेंसी एग्जीक्यूटिव विभाग

क्लाइंट सर्विसिंग डिपार्टमेंट, मार्केट रिसर्च, मीडिया, बाइग एंड प्लानिंग इस विभाग के हिस्से में आते हैं। इस विभाग का काम क्लाइंट की जरूरतों को समझना, सही मीडिया का चुनाव करना, विज्ञापन के लिए स्पेस की व्यवस्था और व्यावसायिक मोलभाव की प्रक्रिया को संभालना होता है।

क्लाइंट सर्विसिंग डिपार्टमेंट

  • क्लाइंट सर्विसिंग डिपार्टमेंट में मार्केटिंग टीम क्लाइंट के साथ संपर्क स्थापित करती हैं और पूरे बिजनेस के बारे में विस्तार से समझती है।
  • ग्राहक की विज्ञापन आवश्यकताओं को समझने के बाद, वह रचनात्मक विभाग के लिए एक संरचित नोट तैयार करती है।
  • रचनात्मक टीम अपनी क्रिएटिविटी के आधार पर टारगेट ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन ऐड बनाने की कोशिश करती है।
  • विज्ञापन की रूपरेखा के लिए क्लाइंट को सहमत करना अकाउंट एग्जीक्यूटिव का काम होता है। क्लाइंट सर्विसिंग प्रोफेशनल क्लाइंट सर्विसिंग डायरेक्टर को रिपोर्ट करते हैं।

मार्केट रिसर्च

एक अच्छी विज्ञापन योजना अनुसंधान से शुरू होती है। यह विभाग बाजार सर्वेक्षण करता है, उपभोक्ता व्यवहार का विश्लेषण करता है और उपभोक्ताओं, बाजारों व प्रतिस्पर्धियों का डेटा एकत्र करता हैं। अनुसंधान एक नए उत्पाद की योजना बनाने के लिए निर्माता को जानकारी प्रदान करता है।

मीडिया बाइंग एंड प्लानिंग

मीडिया बाइंग एंड प्लानिंग का काम विज्ञापन पूरा बनने के बाद शुरू होता है। एडवरटाइजिंग बजट का ठीक से प्रबंधन करना इस विभाग की जिम्मेदारी होती है।

क्रिएटिव विभाग ने जो कुछ भी तैयार किया है उसे लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मीडिया बाइंग एंड प्लानिंग विभाग की होती हैं।

मीडिया बाइंग विज्ञापन प्रबंधन के मुख्य कामों में से एक है। मीडिया बाइंग का मुख्य काम कीमत और प्लेसमेंट के लिए मोलभाव करना और एडवरटाइजिंग के लिए स्पेस और समय खरीदना है।

मीडिया प्लानर्स और मीडिया स्पेशलिस्ट

मीडिया प्लानर्स और मीडिया स्पेशलिस्ट के पास मीडिया आउटलेट्स की विशाल सूची होती हैं जिसमें पारंपरिक मीडिया और न्यू मीडिया दोनों शामिल होता है।

  • पारंपरिक मीडिया – रेडियो, टीवी, पत्रिकाएं, समाचार पत्र आदि।
  • न्यू मीडिया – सैटेलाइट टीवी, केबल टीवी, सैटेलाइट रेडियो, इंटरनेट आदि।
  • ऑनलाइन मीडिया – सोशल मीडिया, ईमेल, सर्च इंजन, रेफरल लिंक, वेब पोर्टल, बैनर, इंटरेक्टिव गेम और वीडियो क्लिप आदि।

मीडिया योजनाकार और विशेषज्ञ सबसे उपयुक्त माध्यम चुन सकते हैं। क्लाइंट कंपनी या तो यह काम किसी बाहरी मीडिया ख़रीदने वाली एजेंसी (Media Buying Agency) को सौंपती है या किसी विज्ञापन एजेंसी को ज़िम्मेदारी सौंपती है जो मीडिया ख़रीदने वाली एजेंसी के साथ मिलकर काम करती है।

इसके साथ ही, मीडिया प्लानर्स और मीडिया स्पेशलिस्ट टीम स्पेस खरीदने के साथ ब्रांड की मार्केटिंग के लिए  नए तरीके खोजती हैं और बिलिंग कलेक्शन का काम भी इन्हीं की जिम्मेदारी है।

क्लाइंट अपनी जरूरत के आधार पर एड एजेंसी (Advertising Agency) के आइडियाज के बारे में जानता है जो कई फैक्टर पर निर्भर करता है जैसे क्या बिजनेस आइडिया नया है, क्या प्रोडक्ट या सर्विस नई है, क्या पुराने प्रोडक्ट को ही नए कलेवर में उतारना है या फिर किसी विशेष अवसर पर विज्ञापन करना है।

क्लाइंट के द्वारा ऐड आइडिया या ऐड स्क्रिप्ट को सेलेक्ट करने के बाद काफी दिमागी मशक्कत करनी पड़ती है और अलग-अलग डिपार्टमेंट के बीच इस पर गहन विचार विमर्श किया जाता है। तब कहीं जाकर क्लाइंट के लिए सही ऐड प्रेजेंटेशन तैयार होता है।

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