फाइनेंस के 8 प्रमुख क्षेत्र जिनमें आप करियर बना सकते हैं

करियर बनाने के मामले में टॉप 5 सेक्टर में फाइनेंस सेक्टर का नाम प्रमुखता से आता है। क्या आप जानते हैं कि वित्त की विभिन्न शाखाएँ और क्षेत्र हैं। फाइनेंस के ये 8 सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं और फाइनेंस शब्द को विस्तृत एवं व्यापक बना रहे हैं।

फाइनेंस के 8 प्रमुख क्षेत्र जिनमें आप करियर बना सकते हैं

ये सभी क्षेत्र मिलकर एक व्यापक फाइनेंशियल सेक्टर का निर्माण करते हैं जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक सेक्टर में स्पेशलाइज्ड करके नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।

कॉर्पोरेट फाइनेंस

  • कॉर्पोरेट फाइनेंस व्यावसायिक संस्थानों के आर्थिक निर्णयों से संबंधित क्षेत्र है।
  • कॉर्पोरेट फाइनेंस व्यवसाय की पूंजी संरचना की योजना, विकास और नियंत्रण को संदर्भित करता है।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य कुशल कॉर्पोरेट प्रबंधन के माध्यम से शेयरधारकों के मूल्य में वृद्धि करना है।
  • कॉर्पोरेट वित्त की मुख्य जिम्मेदारी वित्तीय संसाधनों का बुद्धिमान प्रबंधन करना है।
  • इसमें अधिग्रहण, स्टॉक, ब्रांड खरीद और अन्य विनिवेश उपक्रमों का प्रबंधन भी शामिल है।

प्रोजेक्ट फाइनेंस एंड डेब्ट सिंडीकेशन 

  • यह इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए लंबी अवधि के वित की व्यवस्था है।
  • इसके लिए सबसे पहले प्रॉपर तरीके से किसी प्रोजेक्ट को समझना होता है।
  • प्रोजेक्ट फाइनेंस अनुमानित नकदी प्रवाह के आधार पर किसी प्रोजेक्ट का दीर्घकालिक वित्तपोषण है।
  • इसके साथ ही जोखिम का मूल्यांकन और विस्तृत फाइनेंसियल मॉडल भी तैयार करना पड़ता है।
  • यह इक्विटी पार्टनरों या प्रायोजकों को खुश करने के उद्देश्य से किया जाता है।

वेल्थ मैनेजमेंट

  • वेल्थ मैनेजमेंट निवेश सलाह से संबंधित वित्त का एक व्यापक क्षेत्र है।
  • इसमें फाइनेंसियल प्लानिंग, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और अनेकों वित्तीय सेवाएं शामिल है।
  • उच्च आय वाले पेशेवर, छोटे व्यापारी, रिटेल, बैंकिंग आदि के लिए वेल्थ मैनेजमेंट आवश्यक है।
  • वेल्थ मैनेजर सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर व एमबीए डिग्रीधारी भी हो सकते हैं।
  • वेल्थ मैनेजमेंट सर्विस वित्तीय सलाहकारों या मल्टी लाइसेंस्ड प्राप्त मैनेजरों द्वारा प्रदान की जाती है।

फंड मैनेजमेंट

  • फंड मैनेजमेंट एक वित्तीय संस्थान के नकदी प्रवाह के प्रबंधन से संबंधित है।
  • फंड मैनेजमेंट सबसे अधिक लागत-कुशल और लाभप्रद तरीके से परिसंपत्तियों के संचालन, तैनाती, रखरखाव, निपटान आदि की व्यवस्थित प्रक्रिया है।
  • फंड मैनेजर की जिम्मेदारी ऐसेट-लायबिलिटीज स्ट्रक्चर को बनाए रखना है।
  • फंड मैनेजर को बाजार को प्रभावित करने वाले सभी कारकों का ज्ञान होना जरूरी है।
  • वे स्टॉक मार्केट, डेब्ट मार्केट और प्रत्यक्ष रूप से कंपनियों में निवेश करते हैं।

इन्वेस्टमेंट बैंकिंग

  • इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, बैंकिंग का वह क्षेत्र है जो कंपनियों को फंड खरीदने में मदद करता है।
  • इस सेक्टर में कंपनियों को विभिन्न सोदों के सिलसिले में सलाह भी उपलब्ध करवाई जाती है।
  • निवेश बैंकिंग इक्विटी और डेट सिक्योरिटीज जारी करके कंपनी के लिए पूंजी जुटाने का कार्य भी करती हैं।
  • इसके अलावा, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनियां कंसल्टिंग सर्विस देने का काम भी करती हैं।
  • एक फर्म के लिए पूंजी जुटाने के दौरान, यह निवेशक और जारीकर्ता के बीच एक मध्यस्थ का कार्य करती है।

इक्विटी रिसर्च एंड सेल्स

  • इक्विटी रिसर्च का मुख्य काम स्टॉक एक्सचेंज ट्रेडिंग में शामिल स्टॉक की सही कीमत पता लगाना होता है।
  • दो प्रकार की इक्विटी रिसर्च होती है-
    • सेल्स साइड रिसर्च जो ब्रोकरेज से संबंधी होती है। जिसका उद्देश्य रिसर्च करके निवेशकों को निवेश आईडिया बेचना होता है।
    • बाय साइड रिसर्च जिसमें पोर्टफोलियो व फंड मैनेजर सिक्योरिटीज खरीदने का इरादा रखते हैं।
  • इक्विटी रिसर्च एंड सेल्स की प्रक्रिया यह निर्धारित करती है कि फर्म अपने दम पर शेयर खरीदने की स्थिति में है या नहीं।

प्राइवेट इक्विटी

  • प्राइवेट इक्विटी निजी वित्त पोषण (private financing) का एक वैकल्पिक तरीका है, जो उन निधियों और निवेशकों से बना है जो सीधे निजी कंपनियों में निवेश करते हैं।
  • प्राइवेट इक्विटी क्षैत्र में निवेशकों से विभिन्न संपत्तियों में निवेश करने के लिए धन जुटाया जाता है।
  • बड़े निवेशकों से पैसा इकट्ठा करना और उस पैसे को व्यापार में लगाना इसका मुख्य काम होता है।
  • विदेशी निवेशकों से पैसा फिर से इकट्ठा करके व्यवसाय को आगे बढ़ाना इस काम में शामिल है।
  • एक प्राइवेट इक्विटी फर्म वेंचर कैपिटलिस्ट की तरह ही काम करती हैं और लाभ प्राप्त करती है।

रिटेल बैंकिंग

  • रिटेल बैंकिंग को कंज्यूमर बैंकिंग या व्यक्तिगत बैंकिंग के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह व्यवसायों के बजाय व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को सीधे वित्तीय सेवाएं प्रदान करती है।
  • यह एकल ग्राहकों को उत्पाद या सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए काम करती है।
  • क्रेडिट कार्ड, सेविंग अकाउंट, पर्सनल लोन, ऑटो लोन से जुड़े काम इस क्षेत्र में होते हैं।
  • अब कई फिनटेक कंपनियां रिटेल बैंकिंग के समान सभी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

हमारी नॉलेज के अनुसार फाइनेंस के 8 प्रमुख क्षेत्र है। इसके अलावा भी बहुत सारे फाइनेंस के सेक्टर होते हैं जिसमें कैपिटल मार्केट, कमोडिटी मार्केट, मनी मैनेजमेंट, इंश्योरेंस मैनेजमेंट, मर्चेंट बैंकर, म्यूचल फंड, इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट आदि प्रमुख रूप से शामिल है।

अगर इनके अलावा भी आपके दिमाग में कोई अन्य फाइनेंस की ब्रांच है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। हम उसे भी इस पोस्ट में शामिल करने की कोशिश करेंगे। फाइनेंस में करियर बनाने के लिए बेस्ट ऑफ लक।